पुरकाजी पुलिस द्वारा सीमा पर रोके गए बिहार के प्रवासी मजदूर
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मुजफ्फरनगर। सैकड़ों किमी पैदल आए गोंडा और बिहार के श्रमिकों को घर भेजने के बजाय क्वारंटीन सेंटर भेज दिया गया। ये प्रवासी श्रमिक पंजाब के विभिन्न शहरों से यहां आए थे। रात भर रोडवेज बस स्टैंड पर भूखे-प्यासे पड़े रहे।
प्रवासी श्रमिकों के पैदल आने का सिलसिला जारी है। शुक्रवार रात पंजाब के लुधियाना से चलकर करीब 29 मजदूर रोडवेज बस स्टैंड पर पहुंचे। इनमें 21 गोंडा जिले के हैं जबकि आठ बिहार के शामिल हैं। श्यामू और भगवानदीन ने बताया कि वे लुधियाना में दिहाड़ी मजदूरी करते थे। काम बंद है, पैसे भी नहीं है। इसलिए पैदल ही चल दिए। किसी ने उन्हें बताया कि मुजफ्फरनगर रोडवेज बस स्टैंड से बसों का इंतजाम कर श्रमिकों को घर भेजा जा रहा है। इस आस में रात भर यहीं पड़े रहे। शनिवार सुबह पुलिस ने उनके नाम-पते दर्ज कर एवं स्क्रीनिंग करने के बाद क्वारंटीन केंद्र भेज दिया। श्रमिकों ने बताया कि उन्हें यहां नहीं रुकना है। वे घर जाना चाहते हैं। इसलिए प्रशासन को उन्हें घर भेजने की व्यवस्था करे।
बस की उम्मीद में चले आए ऋषिकेश के परिवार
मुजफ्फरनगर। लॉकडाउन में फंसे उत्तराखंड के ऋषिकेश के परिवार भी रोडवेज बस स्टैंड पर आ गए। कच्ची सड़क पर ये लोग अपनी रिश्तेदार में एक कार्यक्रम में शामिल होने आए थे लेकिन लॉकडाउन के चलते यहीं फंस गए। इनमें कई महिलाएं एवं बच्चे हैं। उन्होंने प्रशासन को घर जाने के लिए अपने नाम नोट करा रखे थे। शनिवार को उन्हें किसी ने बताया कि उन्हें घर भेजने के लिए बसों का इंतजाम हो गया है। इसलिए वे यहां पहुंच गए। सिविल लाइंस इंस्पेक्टर डीके त्यागी ने उन्हें वापस घर भेज दिया। कहा कि जब बसों का इंतजाम हो जाएगा तो उन्हें घर से ही बुला लिया जाएगा।