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संत और गोसेवा को सबसे बड़ा धर्म मानते थे गुरुदेवेश्वर

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शुकतीर्थ स्थित दंडी आश्रम में ब्रह्मलीन महंत स्वामी गुरुदेवेश्वराश्रम महाराज के चित्र पर पुष्? - फोटो : MUZAFFARNAGAR
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मोरना। शुकतीर्थ स्थित दंडी आश्रम में सोमवार को दूर दराज क्षेत्रों से पहुंचे संतों और बाबा के भक्तों ने ब्रह्मलीन महंत स्वामी गुरुदेवेश्वराश्रम महाराज के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।
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आदि शारदा पीठाधीश्वर शंकराचार्य राज राजेश्वराश्रम महाराज ने कहा कि गुरुदेवेश्वराश्रम महाराज संतों से बहुत प्रेम करते थे, जिसके चलते उनके पास संतों का आना जाना लगा रहता था। गो-सेवा के लिए आश्रम में गोशाला का निर्माण कराया। बुलंदशहर के स्वामी प्रबोधाश्रम महाराज ने कहा कि दंडी स्वामी गुरुदेवेश्वराश्रम महाराज उच्च कोटि के संत थे जिन्होंने अपना जीवन धर्म आध्यात्म में लगा दिया। महाशक्ति सिद्ध पीठ की संस्थापिका योगिनी मां राजनंदेश्वरी, प्रबंधक मनोहर लाल, विनोद शर्मा, पूर्व जिला पंचायत सदस्य नरेंद्र त्यागी आदि ने भी स्वामी जी के चित्र के समक्ष पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।

शुकतीर्थ स्थित दंडी आश्रम में ब्रह्मलीन महंत स्वामी गुरुदेवेश्वराश्रम महाराज के चित्र पर पुष्?- फोटो : MUZAFFARNAGAR

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