मोरना (मुजफ्फरनगर)। शुकतीर्थ स्थित दंडी आश्रम के 91 वर्षीय महंत दंडधारी गुरुदेवेश्वर आश्रम महाराज रविवार सुबह ब्रह्मलीन हो गए। संत महात्मा और श्रद्धालुओं सहित राजनेताओं ने उनके पार्थिव शरीर पर पुष्पांजलि अर्पित कर अंतिम दर्शन किए। मंत्रोच्चारण के बीच उनको जल समाधि देते हुए विधि विधान से अंतिम क्रिया क्रम किया।
दंडी आश्रम के पीठाधीश्वर दंडी स्वामी गुरूदेवेश्वर आश्रम महाराज कई माह से बीमारी थे। रविवार सुबह छह बजे वे ब्रह्मलीन हो गए। सूचना मिलते ही नगर वासियों में शोक व्याप्त हो गया। दोपहर दो बजे आश्रम प्रांगण में शुकदेव आश्रम पीठाधीश्वर स्वामी ओमानंद महाराज, महा मंडलेश्वर स्वामी केशवानंद महाराज, दंडधारी स्वामी महादेव आश्रम महाराज, महा मंडलेश्वर गोपालदास महाराज, स्वामी गीतानंद गिरी महाराज, स्वामी भरत देव महाराज, गीतानंद तीर्थ महाराज, बिहार घाट बुलंदशहर आश्रम महंत स्वामी प्रबोध आश्रम महाराज, स्वामी पुरुषोत्तम आश्रम, स्वामी रामास्वामी महाराज, स्वामी राजेंद्रा महाराज आदि ने पुष्प अर्पित कर नमन किया। गुरूदेवेश्वर आश्रम महाराज के पार्थिव शरीर को ट्रैक्टर-टृॉली से बड़ी गंगा इच्छावाल चाहड़ वाला घाट ले जाया गया, जहां पर उन्हें जल समाधि दी गई।
शोक व्यक्त किया
जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. वीरपाल र्निवाल, मोरना ब्लाक प्रमुख अनिल राठी, अमित राठी भाजपा, जोगेंद्र वर्मा, संदीप गुज्जर, सुर्दशन बेदी, प्रधान राजपाल सैनी, प्रेम शंकर मिश्रा, आचार्य इंद्रपाल राणा, नीरज रायल प्रधान, कृष्णकांत शर्मा, राजीव राठी, विनोद शर्मा, धर्मेंद्र शर्मा, डॉ. एसपी भार्गव, डॉ. वीरपाल सहरावत, नीटू आदि ने अंतिम विदाई नगर परिक्रमा में भाग लिया।
ब्रह्मचारी गुरुदत्त से प्रख्यात संत बने दंडी स्वामी गुरूदेवेश्वर
मोरना। जिला संभल थाना रजपुरा के गांव जिजौण्ड़ा गंगा किनारे बसा हुआ है। जिसमें दुर्गा प्रसाद के पांच पुत्र गणेशीलाल, राम स्वरूप, गंगा प्रसाद, सन 1930 को गुरूदत्त, किशोरीलाल सहित लोंगश्री नामक बेटी का जन्म हुआ। गांव से पढ़ाई करने के लिए पैदल रोजाना आठ किमी जाना पड़ता था। जिसके चलते गुरुदत शर्मा ने आठवीं तक पढ़ाई कर सके। गंगा किनारे घरेलू पशुओं को चराना और भजन करना उनके मन को ऐसा भाया कि निकट गंवा कस्बा में हरि बाबा आश्रम में जाकर संत महात्माओं के सत्संग में रम गए।
12 साल की उम्र मेें वह हरि बाबा के आश्रम वृंदावन में जाकर रहने लगे। इलाहाबाद कुंभ के दौरान उनकी भेंट स्वामी विष्णु आश्रम का सानिध्य मिला। उन्होंने गुरू भाई नारायण आश्रम महाराज से दीक्षा ओर नाम गुरुदत्त बह्मचारी मिला। गुरू के आदेश पर वह स्वामी विष्णु आश्रम महाराज के साथ 1956 में वह शुकतीर्थ स्थित दंडी आश्रम आए। जहां पर वीरान पडे़ दंडी आश्रम की जीर्णोद्वार करने के लिए उन्होंने कढ़ी धूप में रात दिन कड़ी मेहनत कर काया पलट दी। कुशल व्यवहार के चलते उनकी लोकप्रियता दिन प्रतिदिन बढ़ती चली गई। ब्रह्मचारी गुरुदत्त महाराज ने 30 जनवरी 2020 को स्वामी स्वामी रमेश आश्रम महाराज से संयास की दीक्षा लेकर सफेद वस्त्र त्याग कर गेरूवे वस्त्र धारण कर दंडधारी गुुरूदेेवेश्वर आश्रम महाराज का नाम मिला। सफेद वस्त्र धारण ओर पांच बडे़ यज्ञ ओर जप से चेहरे पर आये तेज, आश्रम सेवा से प्रभावित होकर परम शिष्य ब्रह्मचारी गुरुदत्त को आश्रम पीठाधीश्वर घोषित किया गया।