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सत्कर्म से मिलता है गोसेवा का सौभाग्य : ओमानंद        

Wed, 09 Nov 2016 12:29 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
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गाय का पूजन करते स्वामी ओमानंद। - फोटो : अमर उजाला
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गोपाष्टमी पर्व पर भागवत पीठ श्रीशुकदेव आश्रम में देश भर से आए श्रद्धालुओं ने गौ पूजन किया। पीठाधीश्वर स्वामी ओमानंद सरस्वती ने कहा कि गोसेवा का सौभाग्य सत्कर्म से मिलता है। गऊ भारतीय संस्कृति की प्रतीक है।       
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शुक्रताल स्थित शुकदेव आश्रम गोशाला में पुरोहितों और आचार्यों ने वेद मंत्रों के साथ गोमाता का पूजन कराया। गो सेवकों को आशीर्वचन में स्वामी ओमानंद सरस्वती ने कहा कि शास्त्रों में गाय को विश्व की माता कहा गया है। गाय भारतीय संस्कृति की प्राण हैं। गोधन सबसे बड़ा धन है। भारत की धार्मिक, आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और आर्थिक समृद्धि में गोवंश की महत्वपूर्ण भूमिका है। गो और गोवंश भारत की कृषि तथा अर्थ व्यवस्था की रीढ़ हैं।

गोसेवा स्वास्थ्य, संपत्ति और उन्नति प्रदान करती है। पूजा विधान में पंचामृत और पंचगव्य का बड़ा महत्व है, जिसकी प्राप्ति गाय से ही होती है। गोसेवा से चतुर्दिक पुरुषार्थ, धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति होती है। उन्होंने कहा कि वेद शास्त्रों में ऋषि मुनियों ने गो की महिमा का वर्णन किया है। गोमाता के साथ अन्याय संस्कृति पर कलंक है। गोवंश का संवर्धन से ही देश में शांति, सुख की प्राप्ति होती है। प्राचार्य ज्ञान प्रसाद, आचार्य गिरीशचंद उप्रेती, अचल शास्त्री, श्याम, राजू एवं श्री शुकदेव संस्कृत विद्यालय के विद्यार्थी आदि मौजूद रहे।      
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भागवत वाणी गूंजी, वटवृक्ष की परिक्रमा      
कार्तिक पूर्णिमा पर्व पर पौराणिक शुकतीर्थ में भागवत कथाओं की अमृत वर्षा हो रही है। देश के अलग-अलग प्रांतों से भागवत भक्त आध्यात्मिक लाभ के लिए श्रद्धा और भक्ति के साथ पहुंचे हैं। श्री शुकदेव आश्रम में अक्षय वट वृक्ष की परिक्रमा की गई। उधर, गंगा तट पर मेले की तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है।    
  
भागवत उद्गम स्थली में श्रीमद्भागवत की अमृत वाणी गूंजने लगी है। श्री डोंगरे जी भागवत भवन, प्रत्यानंद भवन, दंडी आश्रम और अन्य मंदिरों में भागवत श्रवण को श्रद्धालु उमड़े है। श्रीशुकदेव मुनि की अमर कथा के साक्षी वट वृक्ष की परिक्रमा कर पूजन किया गया। वीतराग स्वामी कल्याणदेव महाराज के समाधि मंदिर में दर्शन किए गए। यज्ञ में आहुतियां अर्पित कर राष्ट्र और समाज की समृद्धि की कामना की गई।

नेपाल से आए तीर्थ यात्रियों ने स्वामी ओमानंद से आशीर्वाद लिया। उधर, कार्तिक पूर्णिमा गंगा स्नान मेले के लिए गंगा तट क्षेत्र में तैयारियां अंतिम चरण में हैं। घाट और मुख्य मार्गों पर सफाई नहीं होने से श्रद्धालुओं ने आक्रोश जताया है। हालांकि शुकदेव सेतु की टूटी बाउंड्री का नव निर्माण करा दिया गया। हनुमत धाम, दंडी आश्रम, सच्चा प्रकाश आश्रम, शिवधाम, दुर्गाधाम आदि में भक्तों की आवाजाही बढ़ गई है।       
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