खतौली के गांव तिगाई के कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय की वार्डन एवं शिक्षिकाओं समेत 12 स्टाफ की संविदा समाप्त करने और पुलिस बल के साथ विद्यालय से बाहर निकालने के विरोध में अभिभावकों ने बखेड़ा खड़ा कर दिया। अभिभावक अपनी बालिकाओं को घर ले जाने की जिद पर अड़ गए। विद्यालय पहुंचे एसडीएम और बीएसए ने अभिभावकों को समझाया, लेकिन वे नहीं माने।
विद्यालय से निकालने को लेकर शिक्षिकाएं अधिकारियों के समक्ष खुद को निर्दोष बताते हुए रो पड़ीं। महिला पुलिस के बुलाने पर स्टाफ विद्यालय छोड़कर चला गया। अभिभावक भी विद्यालय से अपनी बालिकाओं को सामान समेत लेकर घर चले गए। विद्यालय में मात्र नया स्टाफ ही रह गया है। विद्यालय में 91 बालिकाएं अध्ययनरत हैं। शुक्रवार को विद्यालय में 71 बालिकाएं मौजूद थीं।
विद्यालय में छात्राओं के कपड़े उतरवाने के विरोध में अभिभावकों ने 29 मार्च को विद्यालय में बखेड़ा कर दिया था। 30 मार्च को तत्कालीन डीएम दिनेश कुमार सिंह ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल कार्रवाई करते हुए वार्डन डॉ सुरेखा तोमर को बर्खास्त कर रिपोर्ट दर्ज कराने के आदेश बीएसए को दिए थे। साथ ही मजिस्ट्रेटी जांच तत्कालीन एसडीएम सदर रेनु सिंह को सौंपी थी।
बीएसए ने वार्डन को बर्खास्त करते हुए कोतवाली में वार्डन के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कराया था। तीन अप्रैल को मजिस्ट्रेटी जांच एसडीएम सदर ने की थी। बीएसए चंद्रकेश यादव के मुताबिक आठ अप्रैल को मजिस्ट्रेटी जांच डीएम को सौंप दी गई थी। मजिस्ट्रेटी जांच में स्कूल स्टाफ और बर्खास्त वार्डन दोनों को ही दोषी माना गया था। डीएम जीएस प्रियदर्शी ने 16 जुलाई को मजिस्ट्रेटी जांच रिपोर्ट में दोषी मानते हुए वार्डन प्रभारी, शिक्षिकाओं समेत समस्त स्टाफ की संविदा सेवा समाप्त कर दी थी।
संविदा सेवा समाप्त करने का पत्र मिलने के बावजूद इन्होंने विद्यालय नहीं छोड़ा। शुक्रवार को अधिकारियों के आदेश पर एबीएसए दिनेश कुमार पुलिस बल लेकर स्टाफ को बाहर निकालने विद्यालय पहुंचे। इसी दौरान विद्यालय में अभिभावक पहुंचे गए। अभिभावकों ने स्टाफ को निर्दोष बताते हुए हंगामा खड़ा कर दिया और अपनी बालिकाओं को विद्यालय से ले जाने पर अड़ गए। सूचना पर एसडीएम कन्हई सिंह और बीएसए चंद्रकेश यादव विद्यालय पहुंचे।
अधिकारियों ने अभिभावकों को काफी समझाया, लेकिन वे नहीं माने। अधिकारियों ने महिला पुलिस को बुलवा लिया। अभिभावक अपनी सभी बालिकाओं को सामान समेत लेकर विद्यालय से चले गए। इसके बाद रोती-बिलखती शिक्षिकाएं एवं स्टॉफ भी विद्यालय छोड़कर चली गईं। बालिकाओं के जाने के बाद विद्यालय खाली हो गया है। विद्यालय में अब सिर्फ नया स्टाफ ही बचा है।
शिक्षिकाओं ने दी आत्मदाह की चेतावनी
संविदा सेवा समाप्त वार्डन नीता चौधरी, शिक्षिका शालू, रजनी त्यागी, बबली, नीलू शर्मा, हिना प्रवीण, एकाउंटेंट अल्पना चौधरी, रसोइया विदोषी, प्राइवेट सहायक रसोइया मालती, कृष्णा और चपरासी महिला सुमन ने कहा कि बालिकाओं के कपड़े उतरवाने के मामले में उनका कोई दोष नहीं है। दोषी वार्डन को बर्खास्त कर दिया गया था। हम बालिकाओं को उनके घर से वापस लेकर आई थीं और अच्छी शिक्षा दी। अब मजिस्ट्रेटी जांच के तीन महीने बाद उनकी गलत तरीके से संविदा सेवा समाप्त की गई है। इसकी दोबारा से निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। वे न्याय के लिए बीएसए कार्यालय पर धरना-प्रदर्शन करेंगी। अगर उनको न्याय नहीं मिला तो वे आत्मदाह करने को मजबूर होंगी।
बालिकाओं का आरोप, बंधक बनाकर पीटा
बालिका मीनाक्षी, खुशी, अंकिता, पारुल, टीना, पायल, नैनसी, हिमांशी आदि बालिकाओं ने बताया कि उनको नई वार्डन और स्टाफ ने कमरे में बंद करके पीटा। बालिकाओं का कहना था कि उनकी मैडम और स्टाफ को गलत तरीके से निकाला जा रहा है। हमें नई मैडम से नहीं पढ़ना है, इसलिए वे अपने माता-पिता के साथ अपने घर जा रहे हैं।
दो शिक्षिकाओं का रिश्ता टूटा
विद्यालय की शिक्षिकाएं एसडीएम और बीएसए के समक्ष फफक-फफक रो पड़ीं। इनका कहना था कि विद्यालय में बालिकाओं के कपड़े उतरवाने के मामले में मजिस्ट्रेटी जांच में उनको भी गलत तरीके से दोषी माना गया है। इस आरोप की वजह से दो शिक्षिकाओं का रिश्ता टूट गया है। दो शिक्षिकाएं इस प्रकरण के दिनों में छुट्टी पर थीं, उनको भी दोषी मान लिया गया। अब वे अपने घर जाकर परिजनों को क्या जवाब देंगी। इस मजिस्ट्रेटी जांच ने उनका जीवन बर्बाद कर दिया है।
रसोइया बेहोश होकर गिर पड़ी
रसोइया विदोषी ने रोते-बिलखते हुए बताया कि एक बाहरी व्यक्ति का विद्यालय में हस्तक्षेप रहता है। उसका आरोप था कि वह कमीशन मांगता है। उसी के कहने पर बर्खास्त वार्डन को बहाल कराने के लिए उनकी संविदा सेवा समाप्त की गई। जब उनको रसोई में पूरा सामान नहीं मिलता है तो बालिकाओं का खाना ठीक से कैसे बन पाएगा। इतना कहकर रोते-रोते वह बेहोश होकर नीचे गिर पड़ी। शिक्षिकाओं ने उसको पानी पिलाकर होश में लाया।
हम तो रोज-रोज के ड्रामों से तंग
विद्यालय पहुंचे अभिभावक विनोद, सुरेंद्र, नरेश आदि का कहना था कि हम तो विद्यालय में रोज-रोज के इन ड्रामों से तंग आ गए हैं। शासन-प्रशासन ने गलत तरीके से स्टॉफ की संविदा सेवा समाप्त की है। इनका कोई दोष नहीं है। हम अब इस विद्यालय में अपनी बालिकाओं को पढ़ाना नहीं चाहते हैं। अभिभावकों ने अधिकारियों से टीसी काटकर देने की बात कही। अधिकारियों का कहना था कि जो अभिभावक बालिका ले जाएगा। वह लिखकर देगा, अभिभावक लिखने को तैयार नहीं हुए थे।
मजिस्ट्रीयल जांच रिपोर्ट देखकर डीएम जीएस प्रियदर्शी ने स्टाफ की संविदा को रिनीवल नहीं किया था और इनकी संविदा सेवा समाप्त कर दी। विद्यालय के स्टाफ में टशन चल रही थी। विद्यालय में बालिकाओं और अभिभावकों को भड़का कर अराजकता फैलाने का माहौल किया गया है। विद्यालय छोड़कर गई बालिकाओं को वापस बुलाया जाएगा और उनको बेहतर शिक्षा दी जाएगी - चंद्रकेश यादव, बीएसए।
अभिभावकों को भड़का कर विद्यालय में अराजकता का माहौल फैलाने को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस संबंध में डीएम को अवगत करा दिया गया है। अभिभावकों से बालिकाओं को वापस विद्यालय छोड़कर जाने के लिए मनाया जाएगा - कन्हई सिंह, एसडीएम।