हरिकिशन मलिक के निधन से शोक में डूबा गठवाला खाप
बुढ़ाना (मुजफ्फरनगर)। गठवाला खाप के बाबा हरिकिशन मलिक के निधन से गठवाला खाप शोक में डूबा है। गठवाला खाप के हरिकिशन मलिक खाप व किसान आंदोलन की धुरी थे। राजनीति ओर लाग-लपेट से दूर रहने वाले बाबा ने किसी भी राजनैतिक दल को विशेष स्थान नहीं दिया। खाप के गांवों में हुई शोकसभा में बाबा मलिक को श्रद्धांजलि दी गई।
गठवाला खाप के चौधरी बाबा हरिकिशन मलिक का बुधवार को निधन हो गया। गांव लिसाढ़ निवासी बाबा हरिकिशन मलिक करीब 94 वर्ष के थे। वर्ष 1985 में उन्होंने गठवाला खाप की कमान संभाली थी। उनके निधन से पूरी खाप शोक में डूबी है। गांव फुगाना निवासी उनके करीबी सेवानिवृत्त जिला वन अधिकारी ओमप्रकाश मलिक ने कहा कि बाबा सादगी व आदर्श के प्रतीक थे। वे अपनी बात कहने में हिचकते नहीं थे। पूर्व प्रधान चौधरी थाम सिंह व चौधरी मुकेश मलिक ने बताया कि भाकियू सुप्रीमो चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत के साथ मतभेद के चलते ही वे उनसे अलग हो गए थे। गांव खेड़ामस्तान निवासी चौधरी शिवकुमार ने कहा कि उनकी खाप के बाबा सच्ची बात कहने वाले थे। सही बात कहने में वे बिल्कुल नही हिचकते थे। रालोद नेता रजनीश मलिक उर्फ पिंकी चौधरी ने कहा कि खाप के बाबा के निधन से खाप को अपूरणीय क्षति हुई है, जिसकी भरपाई नहीं की जा सकती। बृहस्पतिवार को रजनीश मलिक उच्चतर माध्यमिक विद्यालय खेड़ामस्तान, गांव फुगाना, खरड़, डूंगर, करौंदा महाजन, कुरावा, खेड़ीगनी, सरनावली व सुन्ना आदि गांव में शोकसभाओं का आयोजन हुआ। शोकसभा में दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना की।