मुजफ्फरनगर। जिले में पशुओ में खुरपका-मुहपका रोग फैल गया है। दुधारू पशुओं के बीमार होने से पशुपालक किसानों के सामने संकट की स्थिति है। कुछ स्थानों पर पशुओं की मौत भी हुई है। गांवों के साथ शहरी क्षेत्र में भी पशु बीमारी की चपेट में तेजी से आते जा रहे हैं। पशुओ की दवा बेचने वाले मेडिकल स्टोर पर भी भीड़ है।
मौसम परिवर्तन के साथ अक्तूबर माह के पहले सप्ताह से पशुओँ में खुरपका-मुहपका बीमारी फैल जाती है। पशु चिकित्सा विभाग इस बीमारी को रोकने के लिए प्रति वर्ष पशुओँ का टीकाकरण करता है। जिले में साढ़े छह लाख गौवंशीय और महेशवंशीय पशु हैं। भारत सरकार से टीका नहीं मिलने के कारण इस बार 18 अक्तूबर से टीकाकरण की घोषणा की गई थी, लेकिन टीका अभी तक नहीं मिला है, इसलिए अब यह आठ नवंबर कर दी गई है। वेक्सीनेशन अब आठ नवंबर से होगा।
गत वर्ष यह एक अक्तूबर से 23 अक्तूबर तक पूरा हो गया था। टीकाकरण नहीं होने के कारण पशुओँ में बीमारी तेजी से फैलने लगी है। हालत यह है कि एक पशु के चपेट में आते ही घर के सारे पशु चपेट में आ जाते हैं। शहर के केशवपुरी निवासी राजीव राठी की गाय और उसकी बछिया दोनो की बीमारी के बाद मौत हो चुकी है। शांतिनगर निवासी नाहर सिंह सैनी के यहां छह पशु है, जिनमें चार पशु मूहपका -खुरपका की चपेट में है। जिले के अधिकतम गांवों में यह बीमारी फैलना शुरू हो गई है। आदर्श कालोनी में पशुओं की दवा के विक्रेता भगवती मेडिकल स्टोर के संचालक का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्र से बड़ी संख्या में लोग इस बीमारी की दवा लेने के लिए आ रहे हैं। बीमारी लगातार बढ़ रही है। पूर्व पशु चिकित्साधिकारी और वर्तमान में गांधी कालोनी में क्लीनिक चलाने वाले डॉ खिलाडी सिंह का कहना है कि मौसम परिवर्तन के साथ बीमारी बढ़ जाती है। खुरपका-मुहपका बीमारी अचानक बढ़ने लगी है। टीकाकरण ही इसका बड़ा उपाय है। डीएम सीबी सिंह ने जिले में बीमारी के बढ़ने को लेकर कहा कि जो आवश्यक उपाय है वह सभी किए जाएंगे।