मुजफ्फरनगर। स्वामी कल्याण देव जिला अस्पताल में काम करने वाले पूर्व प्रशिक्षु फार्मासिस्ट ने फर्जी इंडेंट बनाकर लाखों रुपये की दवाइयां ड्रग वेयरहाउस से हासिल कर ली। इस मामले में आरोपी के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कराया गया है। सीमएओ ने एसीएमओ के निर्देशन में पांच सदस्यीय कमेटी गठित कर विभागीय जांच के भी आदेश जारी किए हैं।
जिला अस्पताल के पूर्व मुख्य फार्मासिस्ट के कार्यकाल के दौरान प्रशिक्षु फार्मासिस्ट काम करने वाले गुलसनव्वर पुत्र शोकीन निवासी मदीना कालोनी इंडेंट के आधार पर ड्रग वेयरहाउस से जिला अस्पताल दवाइयां लाता था। उसे छह माह की इंटर्नशिप पर रखा गया था। गुल सनव्वर इंटर्नशिप का समय खत्म होने के बाद भी वह वहीं जमा था। चीफ फार्मासिस्ट उसी से ड्रग वेयर हाउस से दवाइयों का उठान कराते थे। करीब आठ माह से ड्रग वेयरहाउस से कुछ दवाइयां लेने के बावजूद उनकी आपूर्ति जिला अस्पताल में नहीं की जा रही थी।
इसका खुलासा भोपा में हुई डकैती के दौरान बदमाशों की ओर से प्रयोग किए गए सरकारी इंजेक्शन से हुआ था। पुलिस की जांच स्वास्थ्य विभाग तक पहुंची तो पता चला कि ये इंजेक्शन जिला अस्पताल के लिए भेजे गए थे, गहराई से छानबीन की गई तो सामने आया कि फर्जी इंडेंट के माध्यम से ड्रग वेयर हाउस से प्रतिबंधित दवाइयां ली जा रही थी। इनमें कई दवाइयां ऐसी हैं जिन्हें नारकोटिक्स की श्रेणी में रखा गया है। सीएमओ डॉ. सुनील तेवतिया ने बताया कि ड्रग घोटाले के मामले में चीफ फार्मासिस्ट की ओर से आरोपी के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कराया गया है। एसीएमओ डॉ. शैलेष जैन के निर्देशन में विभागीय जांच कमेटी का गठन किया गया है। जिसमें जिला अस्पताल के वरिष्ठ परामर्शदाता डॉ. अशोक कुमार, वरिष्ठ रेडियोलॉजिस्ट डॉ.संजीव गुप्ता, डॉ. पंकज और वरिष्ठ फार्मासिस्ट निसार अहमद शामिल हैं।