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पिता-पुत्र को सात वर्ष की सजा, किसान पर किया था कातिलाना हमला 

Fri, 08 Dec 2017 11:06 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
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अदालत। - फोटो : amar ujala
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अदालत ने किसान पर जानलेवा हमला करने के मामले में पिता-पुत्र को सात-सात वर्ष का कारावास और दस-दस हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। इस मुकदमे में सुप्रीम कोर्ट ने छह माह में निस्तारण करने का आदेश 21 जुलाई 2017 में पारित किया था। न्यायालय ने आदेश का पालन करते हुए मात्र पांच माह में मुकदमे का निस्तारण कर दिया। 
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पुरकाजी थाने पर पर मेघाचंदन निवासी बबलू पुत्र धर्म सिंह ने तीन जनवरी 2017 को हत्या के प्रयास का मुकदमा दर्ज कराया था। बताया था कि उसका भतीजा अंकित उर्फ जोधा पुत्र ब्रह्मसिंह रात करीब साढ़े नौ बजे अपने खेत में सिंचाई कर रहा था, तभी सतपाल अपने बेटे जितेंद्र के साथ आया। सिंचाई को लेकर कहासुनी के बाद जितेंद्र ने अंकित को जान से मारने की नियत से गोली मार दी तो उसके पेट के पार निकल गई।

गंभीर घायल अंकित को अस्पताल में भर्ती कराया गया। इस मुकदमे की एडीजे रामसुध सिंह की अदालत संख्या- 4 में हुई। एडीजीसी यशपाल सिंह ने कोर्ट में पांच गवाह पेश किए। न्यायाधीश ने दोनों पक्षों को सुनते हुए अभियुक्त जितेंद्र और उसके पिता सतपाल निवासी ग्राम कैल्लनपुर को धारा 307 के तहत सात-सात वर्ष का कारावास और दस-दस हजार रुपये जुर्माना की सजा सुनाई है। सजा सुनाए जाने के बाद दोनों पिता-पुत्र को जेल भेज दिया गया। 
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नौकरी के नाम पर दस लाख की ठगी 
जालसाजों ने ऊर्जा निगम में लाइनमैन की नौकरी दिलवाने के नाम पर युवक से दस लाख रुपये ठग लिए। इतना ही नहीं आरोपियों ने पीड़ित को फर्जी नियुक्ति पत्र भी सौंप दिया। पीड़ित जब नौकरी लेने विभाग में पहुंचा, तो तब ठगी का पता चला। पीड़ित की ओर से पुलिस ने कोर्ट के आदेश पर मुकदमा दर्ज कर लिया है। 

भोपा थाने पर भोकरहेड़ी निवासी पुष्पेंद्र कुमार पुत्र धर्मवीर सिंह ने कोर्ट के आदेश पर यह मामला दर्ज कराया है। बताया कि एक वर्ष पूर्व उसके परिचित मयंक पुत्र सुरेश, सुरेश पुत्र दामोदर दास निवासीगण पटेलनगर और मनीष तथा नितिन निवासीगण नईमंडी उसके घर पर आए और उसे बताया कि उनकी बिजली विभाग में अच्छी पहचान है। उनका एक रिश्तेदार भी पावर कारपोरेशन में अधिकारी है।

उन्होंने बताया कि अब लाइनमैन की वेकेेंसी निकली हैं, जिसमें वह पुष्पेंद्र के चाचा के पुत्र आकाश की नियुक्ति करा देंगे। इस नियुक्ति में दस लाख रुपये का खर्च आएगा। आरोपियों ने 15 दिन में दस लाख रुपये का इंतजाम करने के लिए कहा। पीड़ित ने 16 सितंबर की सुबह आरोपियों को दस लाख रुपये दे दिए। आरोपियों ने आकाश के फार्मों और कागजों पर हस्ताक्षर कराए। आकाश के शैक्षिक प्रमाण पत्रों की छायाप्रति भी ली। आरोपियों ने आश्वासन दिया कि छह माह के अंदर आकाश की नौकरी बिजली विभाग में लाइनमैन के पद पर लग जाएगी।

आरोप है कि निश्चित अवधि में आकाश की नौकरी नहीं मिली तो पीड़ित ने आरोपियों से संपर्क किया, जिस पर आरोपियों ने उसे एक नियुक्ति पत्र दे दिया। जब नियुक्ति पत्र लेकर आकाश विद्युत कारपोरेशन के आफिस पहुंचा, तो पता चला कि नियुक्ति पत्र फर्जी है। पीड़ित ने आरोपियों से इस विषय में बात की तो उन्होंने दो माह में रुपये लौटाने का वायदा किया, लेकिन निश्चित अवधि में भी आरोपियों ने रुपये नहीं लौटाए। अब आरोपी जान से मारने की धमकी दे रहे हैं। पुलिस ने कोर्ट के आदेश पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। 
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