घिस्सूखेड़ा स्कूल में बैठे बच्चे और बंद पड़ा पंखा
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मुजफ्फरनगर। परिषदीय स्कूलों के समय और बिजली आपूर्ति के शेड्यूल में तीन घंटे का अंतर है। देहात क्षेत्र में बच्चे सुबह सात बजे स्कूल पहुंच जाते हैं, जबकि बिजली आपूर्ति आमतौर पर 10 बजे मिलती है। आपूर्ति शुरू होने के बाद ही कक्षाओं में लगे पंखे घूमते हैं। कई स्कूल ऐसे भी हैं, जिनमें विद्युत कनेक्शन ही नहीं है। ऐसे में पंखे या तो शो पीस बने हैं या फिर बिजली आपूर्ति के लिए आसपास के लोगों की मदद ली जाती है। कई जगह आपूर्ति होने तक बच्चों को पेड़ के नीचे या बरामदों में बैठाकर पढ़ाया जाता है। पुरकाजी के स्कूल में पढ़ने वाले रोजी, तमन्ना, शगुन व दीपांशु का कहना है कि बिजली आने पर ही पंखे चलते हैं।
हमारे स्कूल में 10 बजे से घूमते हैं पंखे
चरथावल। स्कूलों का समय सुबह साढ़े सात से डेढ़ बजे तक है। विद्युत आपूर्ति का शेड्यूल 10 बजे से है। घिस्सूखेड़ा कंपोजिट विद्यालय में पढ़ने वाले प्राची, अनु, रितिका का कहना है 10 बजे से 12.30 बजे तक पंखे चलते है।
बिजली के आने जाने का समय नहीं
बुढ़ाना। विकास खंड़ क्षेत्र के अधिकतर विद्यालयों में पंखे हैं । विद्युत आपूर्ति का शिड्यूल कभी सात तो कभी 10 बजे से होता है। इसके बाद ही पंखे चलते हैं, तब तक बच्चे गर्मी झेलते हैं।
गर्मी में पढ़ने को मजबूर हैं बच्चे
शाहपुर। बसी रोड स्थित जूनियर हाईस्कूल में कक्षा एक से आठ तक लगभग 300 बच्चे हैं । सभी कक्षाओं में पंखे उपलब्ध है। विद्यालय का समय सुबह साढ़े सात बजे से है, लेकिन बिजली आपूर्ति 10 बजे होती है, तब बच्चों को गर्मी में बैठना पड़ता है।