नवीन मंडी स्थल में स्थित ई-नेम का भवन।
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मुजफ्फरनगर। नवीन मंडी स्थल पर ई-नाम की इमारत एक साल से सफेद हाथी साबित हो रही है। इलेक्ट्रॉनिक्स-नेशनल एग्रीकल्चर मार्केट (ई-नाम) के माध्यम से किसान देश में कहीं भी अपनी फसल को आसानी से बेच सकेगा। इसके लिए किसान को केवल मंडी में राष्ट्रीय कृषि बाजार के कार्यालय पर आना है। सरकार और प्रशासन की उपेक्षा के चलते इस इमारत से किसान को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है।
केंद्र सरकार के कृषि मंत्रालय ने जनपद के किसान को देशभर के व्यापारियों से जोड़ने के लिए नवीन मंडी स्थल पर ई-नाम का ऑफिस बनाया है। भवन के निर्माण का कार्य एक वर्ष पूर्व पूरा हो चुका है। इलेक्ट्रॉनिक नेशनल एग्रीकल्चर मार्केट यहां के किसानों के लिए लाभकारी सिद्ध हो सकती है। यहां का किसान सीधे देश के किसी भी प्रदेश और शहर में अपना उत्पाद बेच सकेगा। किसान का माल मंडी में प्लेटफार्म पर रखा जाएगा। यहां से यह ऑनलाइन चढ़ेगा। ई-नाम के शुरू हो जाने से जनपद के किसान के लिए पूरे देश का बाजार खुल जाएगा। जहां किसान को ज्यादा दाम मिलेंगे वहां अपनी फसल बेचेगा। सरकार और प्रशासन की लापरवाही का सबसे बड़ा उदाहरण ई-नाम की इमारत है। तीन मंजिला यह इमारत एक साल से सफेद हाथी साबित हो रही है।
किसी भी फसल को बेच सकेगा किसान
किसान मंडी में ई-नाम के माध्यम से गुड़, गेहूं, धान, मक्का आदि कोई भी फसल बेच सकेगा। देश में किस वस्तु का किस शहर में क्या रेट चल रहा है सीधे देख सकेगा। गुड़ उत्पादक भी अपना गुड़ देश में किसी भी शहर में बेच सकेंगे।
1.40 करोड़ रुपये में हुआ निर्माण
इलेक्ट्रॉनिक नेशनल एग्रीकल्चर मार्केट के लिए केंद्र सरकार ने 1.40 करोड़ का बजट जारी किया था। निर्माण प्रभारी सतेंद्र कुमार ने बताया कि इस पैसे से जहां ई-नाम का ऑफिस बनकर तैयार हुआ है। वहीं नवीन मंडी के 21 ढाबों का जीर्णोद्धार किया गया है। सामान लाने वाले ड्राइवरों के ठहरने के लिए अलग से एक रूम बनाया गया है।
जल्द शुरू होगा व्यापार : बालियान
केंद्रीय पशुधन राज्यमंत्री डॉ संजीव बालियान ने कहा कि किसानों को ई-नाम का लाभ जल्द मिलना शुरू हो जाएगा। इसके लिए वह अफसरों से बात कर रहे हैं। ई-नाम की स्कीम का निर्णय केंद्र सरकार ने 2014-15 में लिया था।