एसडी कालेज मार्किट में रखा कूडा दान का डिब्बा।
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नागरिकों ने अपनी जिम्मेदारी भूली, डस्टबिन बन गए कूड़ा
मुजफ्फरनगर। शहर को साफ सुथरा रखने के लिए किसी को अपनी जिम्मेदारी का अहसास ही नहीं है। आमजन के साथ ही पालिका प्रशासन भी शहर स्वच्छ बनाने में अपनी भूमिका निभाने में अभी तक नाकाम है। सूखे और गीले कूड़े को अलग-अलग एकत्र करने के लिए शहर में लगवाए गए डस्टबिन खुद कूड़ा बन गए हैं। कई स्थानों पर डस्टबिनों का नामोनिशान नहीं रहा।
शहर को साफ-सुथरा रखने के लिए नगर पालिका की ओर से लाखों की लागत से शहर भर में अनेक स्थानों पर करीब पांच सौ सूखे और गीले कूड़े के अलग-अलग डस्टबिन लगवाए थे। इनमें सूखे के लिए नीला और गीले कूड़े के लिए हरा डस्टबिन है। कूड़ाघर नजदीक देख लोगों ने उनमें कूड़ा डालना शुरू कर दिया था। शुरूआत में तो व्यवस्था ठीक-ठाक चली। बाद में कूड़े का रोजाना निस्तारण नहीं हुआ तो आसपास दुर्गंध रहने लगी। डस्टबिन में नागरिकों ने कूड़ा डालना बंद कर दिया। फीटिंग सही न होने से कई जगह से डस्टबिन खुद उखड़ गए। नई मंडी के अधिकांश स्थानों से लोग इन्हें उखाड़कर ले गए। जहां कहीं डस्टबिन बचे है वहां कूड़े को तरस रहे हैं। डस्टबिन उखड़कर कहां गए या लोग डस्टबिन मेें कूड़ा क्यों नहीं डाल रहे पालिका को इससे सरोकार नहीं है। हालात ऐसे है कि लोग कूड़ा इधर-उधर डाल देते हैं। चारों तरफ गंदगी दिखाई देती हैं।
एसडी मार्केट के दुकानदार बाबू बताते हैं कि रोजाना कूड़े का निस्तारण न होने से फैलने वाली दुर्गंध से बचने के लिए लोगों ने मार्केट में लगे डस्टबिन में कूड़ा डालना छोड़ दिया हैं। गांधी कॉलोनी के आशीष अरोरा कहते हैं कि सरकार की योजना तो अच्छी थी, लेकिन पालिकाकर्मियों की वजह से सफल नहीं हो पाई। गांधी कॉलोनी के ही केडी शर्मा बताते हैं कि जब कई दिनों तक डस्टबिन खाली नहीं हुए और नीचे तक फैले कूड़े से दुर्गंध आने लगी तो लोगों ने कूड़े में आग लगा दी, जिसकी चपेट में आकर डस्टबिन भी जल गए। शहर में सूखा और गीला कूड़ा डालने के लिए दोनों प्रकार के डस्टबिन लगाए थे।
मुख्य मार्गों कालोनी और मार्केट में करीब पांच सौ डस्टबिन लगाए थे। नई मंडी में कुछ लोगों ने इन्हें उखाड़ दिया है। कुछ स्थानों पर इन्हें तोड़ दिया गया। लोग लापरवाही में भी इनके बाहर कूड़ा डालते हैं, हालांकि रोजाना इनसे कूड़ा उठाया जा रहा है -अंजू अग्रवाल, नगर पालिका चेयरपर्सन।