लोकतंत्र सेनानी डा. मुस्तफा
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डा. मुस्तफा ने जेल से दी थी ग्रेजुएशन की परीक्षा
मुजफ्फरनगर, चरथावल। आपात काल में डा. मुस्तफा ने बीएससी फाइनल की परीक्षा जेल से दी थी। साढ़े चार महीने जेल यात्रा की पीड़ा उन्हें आज भी दर्द देती है। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा उन्हें ताउम्र जेल में रखे जाने का कानून बनाने की अफवाह सुनाई देती, तो मायूसी छा जाती। डीएवी कॉलेज मुजफ्फरनगर के छात्र नेता होने के कारण प्रशासन के निशाने पर आ गए थे।
आपात काल के में वर्ष 1975 की 13 जुलाई को शेखजादगान निवासी डा. मुस्तफा बाजार स्थित कुएं पर (वर्तमान में शिव चौक) पर लोगों की भीड़ को आपात काल के मायने बता रहे थे। मौके पर भीड़ इकट्ठा हो गई। उस समय चरथावल पुलिस चौकी के दरोगा और सिपाही आए, तो उन्होंने आपात काल मुर्दाबाद के नारे लगाने शुरू कर दिए। 135 दिन जेल में बंद रहे। बकौल मुस्तफा मेरे जेल में बंद होने पर मां जोहरा खातून और पिता अखलाक रात दिन छूटने की चिंता करते थे। जेल में सियासत पर टिप्पणियां इतनी पसंद की गई कि उन्हें रेडियो झूठिस्तान के नाम से ख्याति मिल गई। ब्लॉक से एक मात्र जेल में बंद मुस्तफा द्वारा जेल के लोकतंत्र सेनानियों को देश-विदेश एवं ताजी खबरों को व्यंगात्मक अंदाज में प्रस्तुत करना प्रभावित करता था।