मोहल्ला खालापार निवासी ने अपनी इंटरमीडिएट की आर्ट विषय की मार्कशीट को फर्जी तरीके से साइंस साइड से तैयार कराकर उसी के आधार पर डॉक्टरी कर ली। इसके बाद आरोपी ने न केवल दिल्ली के दयालपुरम में अपना क्लीनिक शुरू कर दिया, बल्कि शहर के रुड़की रोड स्थित मेडिकल कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर का पद भी हथिया लिया। शिकायत पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी समेत अन्य धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
दिल्ली के न्यू गोविंदपुरी निवासी फिरदौस परवीन पुत्री शफीक ने शहर कोतवाली को भेजे शिकायती पत्र में बताया कि मोहल्ला खालापार के नूर मस्जिद निवासी डॉ अब्दुल सलाम पुत्र सुब्हान अल्लाह ने फर्जी कागजात के आधार पर बीयूएमएस की डिग्री हासिल कर ली। महिला के अनुसार, डॉ अब्दुल सलाम ने वर्ष 1995 में शहर के रुड़की रोड स्थित अल्लामा इकबाल यूनानी मेडिकल कॉलेज में बीयूएमएस में एडमिशन लिया था। इसमें उसने अपनी इंटरमीडिएट की सीबीएसई की अंकतालिका, जिसे उसने साइंस विषय से खुद को उत्तीर्ण दिखाया था, लगाई थी।
आरोप है कि उसने इंटरमीडिएट की परीक्षा आर्ट विषय से की थी, जिसे उसने फर्जीवाड़ा करते हुए खुद को साइंस विषय में उत्तीर्ण दिखाया। वर्ष 2001 में छत्रपति शाहूजी महाराज यूनिवर्सिटी कानपुर से बीयूएमएस की डिग्री लेने के बाद आरोपी ने इंटर की फर्जी मार्कशीट के साथ ही उक्त डिग्री लगाकर भारतीय चिकित्सा परिषद, दिल्ली में डॉक्टर के तौर पर अपना रजिस्ट्रेशन करा लिया।
इसके बाद आरोपी ने दिल्ली के ही दयालपुरम एक्सटेंशन के जंग सिंह भवन में, पुराना मुस्तफाबाद में अपना खुद का क्लीनिक शुरू कर दिया। आरोप है कि क्लीनिक के साथ-साथ आरोपी डॉ अब्दुल सलाम मुजफ्फरनगर स्थित एक यूनानी मेडिकल कॉलेज के प्रबंध तंत्र से साठगांठ कर उसमें असिस्टेंट प्रोफेसर भी बन बैठा।
महिला के अनुसार, उसने इस मामले की शिकायत संबंधित यूनिवर्सिटी से की, जिसने जांच कर पूरा मामला सही पाते हुए आरोपी को कारण बताओ नोटिस जारी किया, लेकिन उसने कोई जवाब नहीं दिया। वहीं, संबंधित मेडिकल कॉलेज ने भी आरोपी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। शहर कोतवाली पुलिस ने महिला की शिकायत पर आरोपी डॉक्टर के खिलाफ धोखाधड़ी समेत संगीन धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। इंस्पेक्टर अनिल कपरवान का कहना है कि डॉ अब्दुल सलाम की पूर्व पत्नी फिरदौस परवीन की शिकायत पर यूनिवर्सिटी ने जांच के बाद उनकी डिग्री को फर्जी करार दिया है, जिसके आधार पर रिपोर्ट दर्ज करते हुए मामले की जांच शुरू कर दी गई है।