सत्ता बदलते ही सरकारी महकमों में नए मंत्रियों के फरमान भी आने लगे हैं। स्वास्थ्य महकमे ने प्राइवेट प्रैक्टिस करने पर चिकित्सकों के खिलाफ कार्रवाई के आदेश दिए हैं। ऐसे चिकित्सकों पर जांच के बाद एफआईआर तो दर्ज होगी ही, साथ में चिकित्सकीय डिग्री भी रद होगी। बाकायदा, सीएमओ को इसके लिए गोपनीय रूप से जांच-पड़ताल करने के निर्देश दिए गए हैं।
सरकारी अस्पताल में बढ़ते मरीजों के दबाव और गर्मी के सीजन को लेकर स्वास्थ्य महकमा अलर्ट हो गया है। चिकित्सकों की ओपीडी, मरीजों की संख्या और रोजाना दवाइयों के भंडारण पर निगाह रखी जा रही है। चिकित्सकों की अक्सर शिकायत रही है कि ओपीडी में जल्द काम निपटा कर प्राइवेट अस्पतालों, लैबों और अल्ट्रासाउंड केंद्रों पर कार्य करते हैं। अब प्रदेश में सत्ता बदलते ही सरकारी मशीनरी भी हरकत में आ गई है। विभागों में नए मंत्रियों ने पदभार संभालते ही फरमान भी जारी कर दिए हैं।
जिला स्वास्थ्य विभाग को आदेश दिए हैं कि प्राइवेट प्रैक्टिस करने वाले चिकित्सकों को चिह्नित कर उन पर कार्रवाई की जाए। साथ ही अस्पताल में चिकित्सकों के समय से आने का शेड्यूल बनाया जाए। इतना ही नहीं, कोई चिकित्सक सरकारी अस्पताल से बाहर क्लीनिक, नर्सिंगहोम, अल्ट्रासाउंड या अन्य चिकित्यकीय गतिविधियों में पाया गया तो उसके खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज कराकर जेल भेजा जाएगा।
मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) को चिकित्सक की शिकायत भेजकर डिग्री रद कराने के साथ ही प्रैक्टिस पर प्रतिबंध लगाया जाएगा। सीएमओ डॉ. पीएस मिश्रा ने बताया कि प्राइवेट स्तर पर प्रैक्टिस करने वाले सरकारी डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई के आदेश आए हैं। ऐसे चिकित्सकों की गोपनीय रूप से जांच-पड़ताल कराई जाएगी, क्योंकि सरकारी सेवा में रहते हुए प्राइवेट प्रैक्टिस करना गंभीर अपराध है। सरकार के नियमों का पालन कराया जाएगा।