रामलीला मैदान में गणपति महोत्सव में सांस्कृतिक कार्यक्रम, आकर्षक झांकियों ने मन मोहा
21 सितंबर तक भजनों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की धूम, 22 को निकलेगी विसर्जन यात्रा
संवाद न्यूज एजेंसी
सरधना। रामलीला मैदान में हिंदू युवा संगठन के तत्वावधान में 11वें गणपति महोत्सव का शुभारंभ हुआ। पहले दिन दिल्ली से आए कलाकारों की टीम ने भगवान गणेश के भजनों पर श्रद्धालुओं को जमकर थिरकाया। कार्यक्रम में भगवान गणेश की पूजा-अर्चना के साथ धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का सिलसिला शुरू हुआ।
कार्यक्रम का मंच संचालन पंडित सोनू शर्मा ने किया। मुख्य अतिथि कल्लू सिंह अमीन का संगठन के पदाधिकारियों ने पटका पहनाकर स्वागत किया। आयोजन समिति के ललित गुप्ता ने बताया कि रामलीला मैदान में 21 सितंबर तक प्रतिदिन धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इनमें विभिन्न शहरों और राज्यों से आने वाले कलाकार भगवान गणेश के भजनों की प्रस्तुति देंगे। पहले दिन हनुमान जी की आकर्षक झांकी श्रद्धालुओं के बीच विशेष आकर्षण का केंद्र रही। देर रात महाआरती के बाद श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया।
महोत्सव का समापन 22 सितंबर को भव्य विसर्जन यात्रा के साथ होगा। आयोजकों के अनुसार ढोल-नगाड़ों और गाजे-बाजे के साथ गणपति बप्पा की प्रतिमा को नगर के प्रमुख मार्गों से भ्रमण कराया जाएगा। इसके बाद गंगनहर में प्रतिमा का विधिवत विसर्जन किया जाएगा। इस दौरान हिंदू युवा संगठन के अध्यक्ष अमन गुप्ता, अनिकेत गुप्ता, राकेश कुमार, राजकुमार जाटव, ओम गुप्ता, प्रमोद सक्सेना, अंकित बाली, रजत गोयल, विकास पाल, वंश गोयल, सिद्धार्थ पुष्पक, आशीष विश्वकर्मा, रितिक कुमार समेत बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
पीपल के पत्तों से चंद्रकेतू ने बनाया भगवान गणेश का चित्र
सरधना। गणेश महोत्सव के बीच क्षेत्र में भगवान गणेश की भक्ति के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया जा रहा है। जुलेढ़ा निवासी चंद्रकेतु त्यागी ने पीपल के पत्तों से भगवान गणेश का चित्र तैयार किया है। उनका बनाया चित्र ग्रामीणों के बीच आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। चंद्रकेतु त्यागी ने बताया कि गणेश महोत्सव के दौरान बाजार में कई तरह की मूर्तियां और सजावटी सामग्री इस्तेमाल की जाती है। इनमें कुछ सामग्री पर्यावरण के लिए नुकसानदायक हो सकती है। ऐसे में पीपल के पत्तों से भगवान गणेश का चित्र बनाकर प्रकृति संरक्षण का संदेश देने का प्रयास किया गया है। उन्होंने कहा कि पीपल के पत्ते प्राकृतिक होने के कारण पर्यावरण के अनुकूल हैं। इस तरह की कलाकृतियां लोगों को प्रकृति से जुड़ने और पर्यावरण के प्रति जागरूक होने का संदेश देती हैं। ग्रामीणों ने भी पीपल के पत्तों से बनाए गए गणेश चित्र की सराहना की।
रामलीला मैदान में गणेश चतुर्थी महोत्सव में गणपति बप्पा को भोग लगाते श्रद्धालु स्रोत संवाद
रामलीला मैदान में गणेश चतुर्थी महोत्सव में गणपति बप्पा को भोग लगाते श्रद्धालु स्रोत संवाद