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मिसाइल बन सकती है तो गन्ना छीलने की मशीन क्यों नहीं?

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छपार टोल पर भाकियू कार्यकर्ताओं को संबोधित करते मांगेराम त्यागी - फोटो : MUZAFFARNAGAR
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किसानों ने केंद्र से गन्ना छिलाई की मशीन बनाने की मांग की
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छपार (मुजफ्फरनगर)। दिल्ली-दून हाईवे पर चल रहे भाकियू के अनिश्चितकालीन धरने पर कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार से गन्ना छिलाई वाली मशीन बनवाकर देने की मांग की। वहीं, किसानों के खेतों में गन्ने की छिलाई चीनी मिलों द्वारा कराए जाने और काम के लिए मनरेगा के तहत मजदूर दिलाए जाने की भी मांग की गई।
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कृषि कानूनों के विरोध में चल रहे भाकियू के अनिश्चितकालीन धरने के 65वें दिन कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए मांगेराम त्यागी ने कहा कि गन्ने के दाम पिछले चार साल से नहीं बढ़ाए गए हैं, जबकि खेतों में ईख की छिलाई की मजदूरी 20-25 रुपये क्विंटल से बढ़कर 50 रुपये तक जा पहुंची है। वहीं, दैनिक मजदूरी भी बढ़कर पांच सौ रुपये हो गई है, जो किसान देने में असमर्थ हैं। उन्होंने कहा कि मनरेगा के तहत सरकार को किसानों को मजदूर उपलब्ध कराने चाहिए, जिसकी दो सौ रुपये मजदूरी किसान व दो सौ रुपये सरकार को देनी चाहिए। वहीं, जैसे महाराष्ट्र में किसान का गन्ना वहां की चीनी मिलें ही खेत से छिलवाकर ले जाती हैं, यहां भी चीनी मिलें ही खेतों से गन्ना छिलवाकर खरीदें। वहीं, सरकार को भी अब गन्ना छीलने की मशीन तैयार कराकर चीनी मिलों को देनी चाहिए। जब सरकार बड़ी-बड़ी मिसाइलें तैयार करा सकती है, तो गन्ना छीलने की मशीनें क्यों नहीं तैयार करातीं। इस दौरान काला गुर्जर, शीशपाल, सोमपाल, तोसीन, ललित त्यागी, ओमपाल त्यागी और इकबाल आदि मौजूद रहे।
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