रैली को संबोधित करते जयंत चौधरी।
- फोटो : अमर उजाला
रालोद महासचिव जयंत चौधरी ने कहा कि नेता का दिल बड़ा होना चाहिए। उसके हृदय में संवेदना होनी चाहिए। गरीब की आंखों के आंसू देख उसकी आंखों में आंसू होने चाहिए। नेता के निर्णय से किसी को आघात नहीं पहुंचना चाहिए। नोटबंदी के निर्णय के बाद से 100 लोगों की मौत हो चुकी है, जो भी बीजेपी का विरोध करे उसे राष्ट्रद्रोही करार दे दिया जाता है।
किसान अधिकार रैली में जयंत चौधरी ने देश की वर्तमान राजनीति पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री को सामूहिक फैसलों में विश्वास नहीं है। नोटबंदी से आरबीआई गवर्नर के साथ बैठक में क्या मंथन हुआ, यह सदन में रखा जाना चाहिए। चौधरी चरण सिंह का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि सिद्धांतों की राजनीति होनी चाहिए।
गरीब की पीड़ा देखकर हमारी आंखों में आंसू होने चाहिए। ऐसा व्यवहार हो कि किसी को ठेस न पहुंचे। स्वामी विवेकानंद को मानने की बात करने वाली बीजेपी उनकी बात नहीं मानती। अपनी किताब राजयोग में विवेकानंद ने लिखा है कि हमारे निर्णय से किसी को ठेस नहीं पहुंचनी चाहिए। नोटबंदी के निर्णय से सौ से ज्यादा लोग मर चुके हैं। बेटी की शादी के लिए पैसा नहीं मिलने पर मुजफ्फरनगर में ही किसान आत्महत्या कर चुका है। पांच करोड़ में शिवसेना के राष्ट्रवाद के मायने बदल जाते हैं।
बीजेपी का विरोध करे तो राष्ट्रद्रोही। नोटबंदी में हर रोज नियम बदल रहे। बैंककर्मियों तक को धरने पर बैठना पड़ा। नोटबंदी के फैसले का विजय माल्या, अडानी, अंबानी स्वागत करते हैं। देश के दस घरानों ने बैंकों का 5.73 करोड़ दबा रखा है, जिसे वापस करने का कोई इरादा नहीं है। नोटबंदी इन्हीं लोगों का कर्ज माफ करने के लिए की गई है।
जिस देश में 70 प्रतिशत लोगों के पास मोबाईल नहीं हो और केवल 26 प्रतिशत महिलाओं के ही बैंक में खाते हों, वहां कैश लैस व्यवस्था कैसे चल सकती है। किसान ने उधार बीज, खाद लेकर फसल लगाई है। सब्जी का किसान बर्बाद हो गया है। किसान की हालत बदतर है। मोदी जी ताली बजा रहे है, उन्हें कोई अहसास नहीं है। किसान का कर्ज माफ होना चाहिए और गेहूं आयात से हटाए गए आयात शुल्क के फैसले को वापस लिया जाना चाहिए।