वाराणसी पुलिस लाइन में तैनात हेड कांस्टेबल चंद्र प्रकाश, दरोगा नागेंद्र चौहान, जनपद चंदौली के गांव बैराठ निवासी सहायक अध्यापक धर्मेंद्र कुमार (32), अध्यापक संतोष कुमार व चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी जितेंद्र मौर्य, कृष्णकांत, डीसीएम चालक गोंडा निवासी साधू यादव वाराणसी से डीसीएम में उत्तर पुस्तिकाएं लेकर मूल्यांकन केंद्र पर उतारने आए थे। रविवार रात करीब दो बजे वह सिविल लाइन थाना क्षेत्र में रोडवेज बस अड्डे के पास एसएसपी आवास के सामने एसडी इंटर कॉलेज के गेट पर पहुंचे। गेट बंद होने के कारण डीसीएम वहां खड़ी कर आराम करने लगे।
इसी दौरान हेड कांस्टेबल चंद्र प्रकाश ने सहायक अध्यापक धर्मेंद्र कुमार से खाने के लिए तंबाकू मांगा। शिक्षक ने तंबाकू नहीं होने की बात कही। इसी बात से गुस्साए हेड कांस्टेबल ने सरकारी कारबाइन से शिक्षक पर फायरिंग कर दी। शिक्षक को कई गोलियां लगीं। अन्य साथी कर्मचारियों ने किसी तरह हेड कांस्टेबल को पकड़ा। फायरिंग की आवाज सुनकर रोडवेज बस अड्डे पर तैनात पुलिस कर्मियों ने मौके पर पहुंच कर अधिकारियों को सूचना देते हुए घायल को जिला अस्पताल पहुंचाया। वहां डॉक्टरों ने घायल सहायक अध्यापक को मृत घोषित कर दिया।
एसपी सिटी सत्य नारायण प्रजापत ने मौके पर पहुंच कर मामले की जानकारी ली और शव को मोर्चरी में रखवाया है। उधर, सोमवार सुबह घटना की जानकारी पर सैकडों शिक्षकों ने विरोध जताते हुए सरकुलर रोड पर जाम लगाकर धरना दिया। धरने पर पहुंचे सपा विधायक पंकज मलिक और सपा नेता राकेश शर्मा को शिक्षकों ने लौटा दिया। शिक्षकों का कहना था कि वह राजनीति नहीं चाहते।
भाकियू प्रवक्ता राकेश टिकैत धरने पर पहुंचे और शिक्षकों का समर्थन किया। इस दौरान एडीएम प्रशासन नरेंद्र बहादुर सिंह, एसपी सिटी सत्य नारायण प्रजापत पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों व कई थानों की पुलिस के साथ पहुंचे। 11 शिक्षकों की समिति ने जिलाधिकारी अरविंद मल्लपप्पा बंगारी व एसएसपी अभिषेक सिंह से मुलाकात की। दोनों अधिकारियों ने आश्वासन दिया। इसके बाद धरना समाप्त कर दिया गया। शिक्षक के परिवार को 25 लाख रुपये की आर्थिक सहायता मिलने के बाद शिक्षकों ने धरना समाप्त किया।
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