मुजफ्फरनगर। अधिवक्ता की शिकायत पर उच्च न्यायालय के आदेश के बाद मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कविता अग्रवाल ने दरोगा वीरेंद्र कुमार के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के आदेश पारित किए है। दरोगा पर न्यायालय के आदेशों के बावजूद मुकदमे में नक्शा नजरी रिपोर्ट लगाने के लिए वादी की माता से 25 हजार रुपये मांगने और अभद्र व्यवहार करने का आरोप है।
दो साल पहले अधिवक्ता दिलबहार अली ने दरोगा वीरेंद्र कुमार के विरुद्ध सीआरपीसी की धारा 156 (3) में अभियोग पंजीकृत कराने के लिए सीजीएम के यहां अर्जी लगाई थी। वादी दिलबहार ने बताया कि वर्ष 2024 में थाना ककरौली में तैनात दरोगा ने गुफरान बनाम मुनीर आदि के मुकदमे में अदालत के आदेश के बावजूद नक्शा नजरी रिपोर्ट नहीं लगा रहा था। दरोगा ने उनकी माता से अभद्र व्यवहार किया और रिपोर्ट लगाने की एवज में 25 हजार रुपये की मांग की।
दरोगा के व्यवहार से क्षुब्ध होकर अधिवक्ता ने सीजेएम के न्यायालय में प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए गुहार लगाई। लेकिन 18 सितंबर वर्ष 2024 को अदालत ने वादी की अर्जी खारिज कर दी। निचली अदालत के आदेश के विरूद्ध सेशन न्यायालय में क्रिमिनल रिवीजन दाखिल किया गया। लेकिन अपर सत्र न्यायाधीश ने 16 जुलाई 2025 को निरस्त कर दिया।
इसके बाद पीड़ित ने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। हाईकोर्ट खंडपीठ ने सीजएम और एडीजे के आदेशों को अपास्त कर दिया। उकत वाद को पुन: मूल नंबर पर कायम करते हुए नवीन आदेश पारित करने के आदेश पारित किए। इस आदेश के अनुपालन में थाना प्रभारी को आरोपी दरोगा के विरूद्ध सात दिन में प्राथमिकी दर्ज कर विवेचना करने के आदेश दिए है।
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