मुजफ्फरनगर। अदालत ने साइबर क्राइम में बीसीए के छात्र अरमान की जमानत खारिज कर दी। जिला सत्र न्यायाधीश बीरेंद्र सिंह ने निर्णय सुनाया। केरल और तमिलनाडु में डिजिटल अरेस्ट के बाद करोड़ों रुपयों की ठगी के तार मुजफ्फरनगर से जुड़े पाए गए।
11 फरवरी को साइबर थाने के निरीक्षक रवींद्रपाल सिंह ने प्राथमिकी दर्ज कराई। आरोप है कि पांच फरवरी को केरल की महिला रीना से डिजिटल अरेस्ट कर विभिन्न मोबाइल फोन का प्रयोग करते हुए 26 लाख रुपये ठगी की। दूसरी शिकायत दिसंबर में तमिलनाडु के कोयंबटूर में शिकायतकर्ता पंचपकेसन ने दर्ज कराई। उनके साथ पुलिस अधिकारी बनकर डिजिटल अरेस्ट कर आरोपियों ने चार करोड़ रुपये ठग लिए थे।
इस राशि में 50 हजार रुपये चरथावल की पंजाब नेशनल बैंक शाखा में आना पाया गया। खाता कुटेसरा के नदीम के नाम से संचालित है। पुलिस टीम ने संबंधित तारीख में बैंक शाखा की सीसीटीवी फुटेज खंगाली। इसमें नदीम के साथ एक अन्य व्यक्ति बैंक से 1.90 लाख रुपये निकालते हुए दिख रहा है। बताया कि दूसरा व्यक्ति कुटेसरा का गुफरान है।
पुलिस विवेचना के दौरान खालापार निवासी आरोपी अरमान को गिरफ्तार किया। इसके कब्जे से बरामद दो मोबाइल फोन में आईफोन में कोई सिम नहीं पाया गया। दूसरे फोन में खाता डाउनलोड पाया गया।
इसमें 12 अक्तूबर 2025 से 12 फरवरी 2026 तक 6,01,843 रुपये आना और 6,37,376 रुपयों का ट्रांसफर किया जाना पाया गया। इसके अलावा अलग-अलग बैंकों में करीब 30.37 लाख रुपयों का आना पाया गया। पीठासीन अधिकारी ने सुनवाई के बाद आरोपी छात्र की जमानत निरस्त कर दी।