संवाद न्यूज एजेंसी
मुजफ्फरनगर। नगर पालिका निर्माण विभाग में ठेकेदारों को ऑफलाइन टेंडर डालने से रोकने पर हंगामा हो गया। ठेकेदारों की शिकायत पर डीएम उमेश मिश्रा ने सिटी मजिस्ट्रेट विकास कश्यप को मामले की जांच के लिए नगर पालिका भेजा। सिटी मजिस्ट्रेट ने बताया कि उनके आने से पहले ही ऑफइलान टेंडर डलवाए जा चुके थे।
नगर पालिका में टेंडर को लेकर लगातार खेल हो रहा है। सात अक्तूबर की बैठक के बाद शहर में विभिन्न विकास और निर्माण कार्य को लेकर करीब 204 टेंडर तैयार किए गए थे। मगर मीरापुर उप चुनाव के चलते लगी आचार संहिता के कारण प्रक्रिया में देरी हुई। एक जनवरी को टेंडर खुले तो 100 से अधिक टेंडर में कोई निविदा नहीं निकली। वहीं कुछ नियमानुसार न होने के कारण कैंसिल कर दिए। मात्र 48 निर्माण कार्यो के टेंडर ही सही पाए गए, जिनके सापेक्ष वर्क ऑर्डर जारी कर दिए। बाकी 75 निर्माण और विकास कार्यों के लिए री टेंडरिंग की गई थी, जबकि अन्य के लिए प्रक्रिया चल रही है।
बृहस्पतिवार को ऑफलाइन टेंडर के माध्यम से आवश्यक दस्तावेज लिए जाने थे। कुछ ठेकेदार पालिका निर्माण विभाग में ऑफलाइन टेंडर के लिए पहुंचे, लेकिन वहां हंगामा हो गया। ठेकेदारों की ओर से डीएम से शिकायत कर आरोप लगाया गया कि कुछ सभासदों ने उन्हें टेंडर डालने से रोक दिया। इसके बाद सिटी मजिस्ट्रेट नगर पालिका पहुंचे और उन्होंने निर्माण विभाग के अधिकारियों एवं शिकायतकर्ता ठेकेदारों से वार्ता की। उन्होंने बताया कि ठेकेदार अभिमन्यु की ओर से पालिका के दो सभासदों की शिकायत डीएम से की गई थी। डीएम के आदेश पर उन्होंने पालिका पहुंचकर मामले की जांच की। बताया कि शिकायतकर्ता ने टेंडर के लिए अपने दस्तावेज जमा करा दिए।
दिन भर रही 75 टेंडर निरस्त करने की चर्चा
एक जनवरी को काफी टेंडर निरस्त होने के बाद चार करोड़ रुपये के विकास एवं निर्माण कार्य कराने के लिए रिटेंडरिंग की गई थी, जिन्हें कैंसिल किये जाने को लेकर दिन भर चर्चा का बाजार गर्म रहा। यह अफवाह फैली की 75 टेंडर काफी बिलों पर होने के कारण उनमें पूल की आशंका जताई गई, जिसे देखते हुए उनको निरस्त करने का आदेश जारी किया गया। हालांकि ईओ पालिका डॉ. प्रज्ञा सिंह ने टेंडर निरस्त किए जाने से इंकार किया।