जमीन अधिग्रहण - प्रतीकात्मक तस्वीर
उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में दिल्ली-देहरादून राष्ट्रीय राजमार्ग के लिए अधिगृहीत की गई भूमि में बड़ा घोटाला सामने आया है। एक किसान परिवार को बिना अधिग्रहण किए ही करीब पौने चार बीघा जमीन का मुआवजा दे दिया गया। तहसील की टीम ने पैमाइश की तो पूरा खेल सामने आ गया। इस मामले में कई अधिकारी फंस सकते हैं।
पुरकाजी में बाईपास के लिए 2011 में भूमि अधिग्रहण किया गया था। फलौदा गांव के रमेशचंद, महेशचंद, सुरेशचंद पुत्रगण भगीरथ की खसरा नंबर 47 से 23 बीघा में से 18 बीघा भूमि अधिगृहीत की गई। इसका मुआवजा भी दे दिया गया।
गांव के ही विशेष त्यागी ने 21 अक्तूबर 2020 को एसडीएम सदर से कम भूमि अधिगृहीत होने की शिकायत कर दी। तहसीलदार सदर, राजस्व कानूनगो और हल्का लेखपाल की टीम ने 11 नवंबर को पैमाइश की, तो अधिगृहीत की गई जमीन करीब 14.25 बीघा ही निकली।
47 लाख रुपये का अधिक किया भुगतान
इस जमीन का 12.23 लाख रुपये प्रति बीघा के हिसाब से भुगतान किया गया था। इस तरह करीब 47 लाख का गोलमाल हुआ है।
एसडीएम की जांच रिपोर्ट प्राप्त हो गई है। इसी के आधार पर कम जमीन अधिगृहीत करने और मुआवजा अधिक दिए जाने का मामला सामने आया। परियोजना निदेशक भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग देहरादून को कार्रवाई के लिए पत्र लिखा है। आगे की कार्यवाही हाईवे के अधिकारी करेंगे।
- आलोक कुमार, एडीएम वित्त मुजफ्फरनगर