पंचायती राज सेवा परिषद के आह्वान पर पंचायत राज विभाग के कर्मचारियों ने कलक्ट्रेट में धरना, प्रदर्शन किया। सिटी मजिस्ट्रेट को सीएम के नाम ज्ञापन दिया, जिसमें ग्राम्य विकास विभाग को पंचायत राज विभाग से मुक्त कराने की मांग की गई। कर्मचारियों ने अपनी मांग को लेकर 17 जून को लखनऊ में प्रदर्शन कर सीएम आवास का घेराव करने की घोषणा की।
पंचायत राज विभाग के कर्मचारियों ने शुक्रवार को कार्य से विरत रह कर डीएम कार्यालय पर धरना देकर अपनी मांग के समर्थन में प्रदर्शन किया। धरने पर परिषद के जिलाध्यक्ष जितेन्द्र सिंह पुण्डीर ने कहा कि वर्ष 1987 में शासनादेश जारी कर आयुक्त ग्राम्य विकास एवं पंचायत राज का पद सृजित करते हुए दोनों विभागों के विलय की कार्यवाही शुरू कर दी गई थी, जो दुर्भाग्य से पूर्ण नहीं हो सकी।
परन्तु शासनादेश से ग्राम्य विकास विभाग का जन्म हो गया और प्रदेश में दो विभाग ग्राम्य विकास एवं पंचायत राज विभाग वजूद में आ गए। इसके बाद पंचायती राज विभाग को लेकर कई विसंगति सामने आई, लेकिन इनको दूर करने का काम नहीं किया गया। धरना प्रदर्शन के बाद मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सिटी मजिस्ट्रेट राजेंद्र सिंह को सौंपा गया।
जिसमें मुख्यमंत्री से ग्राम पंचायत से लेकर प्रदेश स्तर तक ग्राम्य विकास विभाग के नियंत्रण से पंचायत राज विभाग को मुक्त कर विभागों के मध्य समन्वय बनाने के लिए आईएएस या पीसीएस अधिकारियों को अधिकृत करने, सहायक विकास अधिकारी पंचायत पर खंड विकास अधिकारी के नियंत्रण के अधिकारी को समाप्त करने और ग्राम्य विकास विभाग के कर्मी, जो पंचायत राज विभाग में ग्राम पंचायत के सचिव का काम देख रहे हैं,
उन्हें सचिव ग्राम पंचायत के कार्यों से हटाये जाने की मांग की गई है। धरना, प्रदर्शन में अध्यक्ष जितेन्द्र सिंह पुण्डीर के अलावा महामंत्री चन्द्रप्रकाश शर्मा, मुनेश कुमार शर्मा, नितिन कमार, जयकरण, विजयपाल, सत्यपाल सिंह, ब्रजपाल शर्मा, चन्द्रपाल सिंह, प्रदीप कुमार, निसार अहमद, सोमदत्त, शिवकमार, सोमप्रकाश, संदीप कुमार, शिवनन्दन, निदेश कुमार, विनय शर्मा, सतेन्द्र वर्मा, ललित कुमार, जयभगवान, शिवकुमार, प्रदीप, सन्तरपाल, नीरज, अमित आदि कर्मचारी शामिल रहे।