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खंडहर में तब्दील हो रही सर छोटूराम इंटर कॉलेज की बिल्डिंग

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चौधरी छोटूराम इंटर कॉलेज का जर्जर हो चुका भवन। - फोटो : MUZAFFARNAGAR
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खंडहर में तब्दील हो गई छोटूराम इंटर कॉलेज की बिल्डिंग
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मुजफ्फरनगर। जिले की पुरानी शिक्षण संस्थाओं में से एक छोटूराम इंटर कॉलेज की बिल्डिंग जर्जर हालत में पहुंच चुकी है। बिल्डिंग की छत और दीवारें अपने आप ही टूटकर गिरने लगी है। छात्रों के साथ हर समय हादसे की स्थिति बनी रहती है। वर्ष 1938 में बनी यह बिल्डिंग उपेक्षा का शिकार है। 23 सालों से कॉलेज में प्रबंध समिति ही नहीं है।
सरकुलर रोड पर स्थित छोटूराम इंटर कॉलेज शहर की प्राचीन संस्थाओं में से एक है। जाट समाज के लोगों ने एक-एक पैसा जोड़कर इस संस्था को खड़ा किया। गांव-गांव से चंदा एकत्र किया गया और एक बड़ी इमारत खड़ी की गई। शहर में किसी दूसरे कॉलेज के पास इतनी अच्छी बिल्डिंग नहीं है। देखरेख के अभाव में यह इमारत जीर्णशीर्ण की हालत में पहुंच गई है। कॉलेज की देखरेख का कार्य प्रबंध समिति करती है। बीते 23 सालों से विवाद के चलते यहां प्रबंध समिति ही कार्यरत नहीं है। जीआईसी इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य कॉलेज के प्रशासक हैं। प्रबंध समिति के कॉलेजों को कोई सरकारी सहायता नहीं मिलती है। बिल्डिंग की मरम्मत का पैसा भी सरकार जारी नहीं करती। प्रबंध समिति है नहीं और सरकार पैसा देती नहीं, शिक्षकों को केवल अपनी नौकरी से मतलब है, ऐसे हालात में गिरती बिल्डिंग की किसी को चिंता नहीं है। इमारत में कुल 21 कमरे हैं, इनमें 11 तो ऐसे हैं जिनकी दीवारों का प्लास्टर टूटकर गिर चुका है। नीचे का फर्श उखड़ गया है और छत टूटकर गिर रही है। दो-तीन कमरे तो पूरी तरह खंडहर बन चुके हैं। खंडहर बने कमरों में बिज्जू पैदा हो चुके हैं। कक्षा में पढ़ रहे छात्रों के लिए भी हर समय खतरा बना रहता है। बिल्डिंग का हिस्सा टूटकर गिरने से कोई हादसा न हो जाए इसकी चिंता हर समय बनी रहती है।
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कॉलेज में 700 बच्चे अध्ययनरत
मुजफ्फरनगर। जिले की बड़ी शिक्षण संस्था छोटूराम इंटर में आज केवल 700 छात्र-छात्रा ही अध्ययनरत हैं। एक समय में यहां एडमिशन को लेकर मारामारी रहती थी। बीच में हालात इतने खराब हुए थे कि एक बार यहां छात्रों की संख्या मात्र 180 रह गई थी। कक्षा छह से 12वी तक के इस कॉलेज में इमारत ठीक हो जाए और माहौल बने तो संख्या बढ़ सकती है।
कॉलेज में नहीं एनसीसी
मुजफ्फरनगर। छोटूराम इंटर कॉलेज की पहचान एक समय में एनसीसी के कारण होती थी। ग्रामीण अंचल के छात्र यहां पढ़ाई के साथ एनसीसी में भी भाग लेते थे। कॉलेज की आपसी राजनीति के चलते कई वर्षों से यहां एनसीसी नहीं है। अव्यवस्था के चलते ये सब हुआ है।
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हमारे पास पैसे का अभाव: प्रधानाचार्य
मुजफ्फरनगर। छोटूराम इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य नरेश प्रताप सिंह का कहना है कि सरकार से सीधे आर्थिक सहायता का कोई प्रावधान नहीं है। प्रबंध समिति ही व्यवस्था करती थी, अब वह भी नहीं है। हमारे पास इतना फंड नहीं है कि हम बिल्डिंग की मरम्मत करा सकें।
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