मुजफ्फरनगर। किसान मसीहा चौधरी चरण सिंह गांवों की तरक्की के लिए हर वर्ग को काम और शिक्षा के हिमायती थे। प्रदेश के मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने शहर में डॉक्टर भीमराव आंबेडकर छात्रावास के निर्माण को मंजूरी दी थी। फिलहाल 34 कमरों के इस हॉस्टल में कई जिलों के 132 विद्यार्थी रहते हैं। शिक्षा ऋषि वीतराग स्वामी कल्याणदेव ने चौधरी साहब के समक्ष गरीब विद्यार्थियों की आवासीय समस्या की बात रखी थी।
गांधी कालोनी रेलवे ओवरब्रिज के पास बना डॉ. भीमराव आंबेडकर छात्रावास चौधरी चरण सिंह की दूरदर्शिता की देन है। जब पहली बार वे सूबे के सीएम बने तो स्वामी कल्याणदेव ने गांव से शहर पढ़ने आए गरीब विद्यार्थियों के रहने की समस्या उनके सामने रखी। यह 1967 की बात है। उन्होंने तत्काल समाज कल्याण विभाग से 30 हजार रुपये का अनुदान स्वीकृत कर दिए। शिक्षा ऋषि के मार्ग दर्शन में यह हॉस्टल बना। ग्रामीण अंचल के छात्र यहीं रह कर पढ़ने लगे। भागवतपीठ शुकदेव आश्रम के पीठाधीश्वर स्वामी ओमानंद सरस्वती बताते हैं कि गुरुदेव को डीएवी कॉलेज में शामली के नौजल गांव का कलीराम और नौनांगली का एक गरीब छात्र पेड़ के नीचे खाना बनाते मिले। उन्होंने उनके दर्द को समझा और छात्रावास बनाने का संकल्प लिया। खुद दान से 20 हजार रुपये एकत्रित किए।
चौधरी साहब ने सरकार से 30 हजार के अनुदान दिलवाया। तब हॉस्टल में 18 कमरे बनवाए गए। छात्रावास समिति के संचालन में जानसठ से बीकेडी के पूर्व विधायक स्वर्गीय मनफूल सिंह का अहम योगदान रहा। छात्रावास प्रबंधक मनोज कुमार उर्फ मनु के मुताबिक फिलहाल छात्रावास में शामली, मेरठ, बागपत, बलिया, मऊ, अलीगढ़, आजमगढ़, पानीपत आदि के 132 विद्यार्थी रहते हैं। छात्र राहुल, प्रिंस, इंदर सिंह, आशीष, रवि, कंवरपाल आदि ने बताया कि दूरदराज से आए विद्यार्थियों के लिए डॉक्टर भीमराव आंबेडकर छात्रावास पढ़ाई का मुख्य केंद्र बन गया है।
वर्ष 1983 में चौधरी साहब आए थे हॉस्टल
मुजफ्फरनगर। वर्ष 1983 में चौधरी चरण सिंह जिले में आए, तो उन्होंने छात्रावास देखने की इच्छा जताई। पूर्व विधायक मनफूल सिंह ने उन्हें विद्यार्थियों से मिलवाया। बड़े चौधरी ने सबको ध्यान से सुना और उच्च शिक्षा के लिए प्रेरित किया।
कॅरियर में छू रहे ऊंचाइयां
मुजफ्फरनगर। छात्रावास में रह रहे विद्यार्थी कॅरियर में भी ऊंचाइयां छू रहे हैं। यूपी पुलिस में 12 और रेलवे के लोको पायलट में सात स्टूडेंट ने कामयाबी पाई है। यहां का स्वर्णिम इतिहास रहा है। कांधला के गंगादास आईएएस बने, जबकि काबड़ौत का मिट्ठनलाल और मवाना का हरपाल पीसीएस बने।
भाती थी तपती धरती पर पहली बारिश की बूंदों की महक
मुजफ्फरनगर। पूर्व मंत्री धर्मवीर बालियान बताते हैं चौधरी चरण सिंह को मिट्टी की खुशबू खूब भाती थी। उन्हें सबसे ज्यादा आनंद तब मिलता है, जब मई-जून में तपती धरती पर पहली बारिश की पड़ती बूंदों से जमीन की खुशबू आती है। शहर के जीआईसी मैदान में 1979 में चौधरी साहब की जनसभा थी। लोकदल का चुनाव निशान दो बैलों की जोड़ी था। उनकी पार्टी से मुजफ्फरनगर से गयूर अली तथा कैराना से गायत्री देवी सांसद का चुनाव जीती थी। 1982 में पूर्व पीएम ने फिएट कार खरीदी थी। मुझे बोले कोई बेरोजगार गरीब लड़का दो, जो मेरी कार का ड्राइवर बन सके। बाद में बुलंदशहर के एक लड़के को ड्राइवर रखा गया। उनके लिए उसूल पहले तथा राजनीति बाद में थी।