भाजपा नेता और कार्यकर्ता।
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लंबे समय से चली आ रही अटकलों के बीच आखिरकार रालोद की एनडीए में एंट्री हो गई है। रालोद अध्यक्ष जयंत सिंह ने शनिवार को दिल्ली में भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा और गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की। इसके बाद एक्स पर दोनों ओर पोस्ट भी किए गए। रालोद अध्यक्ष की ओर से एनडीए में शामिल होने की पुष्टि की गई। उधर, सोमवार को रालोद अध्यक्ष की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात होने की संभावना है।
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भाजपा ने शनिवार को ही लोकसभा सीटों पर अपने प्रत्याशियों की पहली सूची जारी करते हुए प्रदेश की 51 सीटों पर प्रत्याशियों की घोषणा की है। भाजपा पहले ही रालोद को दो सीट देने की बात कह चुकी है, जिनमें बागपत और बिजनौर की सीट शामिल है।
भाजपा और रालोद के बीच गठबंधन होने पर दोनों को ही पश्चिम उत्तर प्रदेश में लोकसभा चुनाव में फायदा होगा। गठबंधन होने से रालोद का पारंपरिक जाट वोट एनडीए को मिलेगा जिससे जाट प्रभावित लोकसभा सीटों पर गठबंधन प्रत्याशियों की जीत की संभावना ज्यादा रहेगी।
पश्चिम उत्तर प्रदेश की मेरठ बागपत, कैराना, बुलंदशहर, गाजियाबाद, बिजनौर, नोएडा, अमरोहा, मुरादाबाद, संभल, पीलीभीत, बरेली, आंवला, बदायुं, मथुरा, फतेहपुर सीकरी, फिरोजाबाद, आगरा, अलीगढ़, हाथरस सीटों पर जाट वोटर हैं। इनमें अधिकतर सीटों की यह स्थिति है कि वहां जाट वोटर चुनाव प्रभावित कर है और जाटों को सबसे ज्यादा रालोद के साथ माना जाता है। उधर, भाजपा के साथ गठबंधन के निर्णय का रालोद नेताओं ने भी स्वागत किया है। रालोद नेताओं का कहना है कि पार्टी अध्यक्ष ने सही कदम उठाया है।
राष्ट्रीय सचिव डॉक्टर राजकुमार सागवान का कहना है रालोद का एनडीए के साथ जाने का फैसला देश और किसान हित में लिया गया है। पार्टी सुप्रीमो चौधरी जयंत सिंह किसानों, मजदूरों और नौजवानों की लड़ाई लड़ते रहे हैं। अब रालोद एनडीए के साथ मिलकर साझा न्यूनतम कार्यक्रम के तहत काम करेगा, जिससे सभी वर्गों का विकास होगा। रालोद एनडीए के 400 पार नारे को पूरा कराने में पूरा सहयोग करेगा।
राष्ट्रीय सचिव डॉक्टर कुलदीप उज्ज्वल का कहना है कि पार्टी का एक-एक कार्यकर्ता गठबंधन धर्म का पालन करते हुए अपने नेता चौधरी जयंत सिंह को मजबूती प्रदान करेगा। हम सब लोग अपने नेता के फैंसले के साथ हैं।
प्रदेश प्रवक्ता सुनील रोहटा ने कहा कि राष्ट्रीय लोकदल अध्यक्ष जयंत चौधरी ने एनडीए में शामिल होने का निर्णय देशहित, समाजहित और किसानों के हित को ध्यान में रखते हुए लिया है। राष्ट्रीय लोकदल हमेशा से किसानों, मजदूरों और समाज के सभी वर्गों के लिए संघर्षरत रही है। राष्ट्रीय लोकदल के एनडीए में शामिल होने से आगामी लोकसभा चुनाव में 400 पार के नारे को पूरा करने की लड़ाई लड़ी जाएगी। किसानों और मजदूरों के हकों के लिए ही रालोद ने ये अहम फैसला लिया है।