अवैध रूप से सड़कों पर दौड़ रहे ई-रिक्शा चालकों के साथ अब ई-रिक्शा बेचने वालों पर भी कार्रवाई की तैयारी है। ई-रिक्शा बेचने के नाम पर सर्टिफिकेट हथियाने वाले कारोबारियों की जांच-पड़ताल शुरू हो गई है। अधिकारियों को गुमराह करने वाले कारोबारियों का लाइसेंस निरस्त किया जाएगा। एआरटीओ ने ट्रेड सर्टिफिकेट लेने वालों से ई-रिक्शा फरोख्त का ब्यौरा मांगा है।
प्रशासन के दबाव के बाद करीब एक हजार से अधिक ई-रिक्शा चालकों के लाइसेंस बने, लेकिन ई-रिक्शा के पंजीकरण का औसत बेहद कम निकला है। ई-रिक्शा चालक बिल नहीं दिखा सके हैं। जिस कारण इनका पंजीकरण नहीं किया गया, जबकि शहर में ई-रिक्शा बेचने के लिए प्रशासन और एआरटीओ से करीब 10 कारोबारियों ने ट्रेड सर्टिफिकेट लिया हुआ है, जो ई-रिक्शा नहीं बेच रहे हैं।
ट्रेड सर्टिफिकेट की आड़ में अन्य कारोबार कर रहे हैं। एआरटीओ स्तर से इनके खिलाफ जांच-पड़ताल कराई जा रही है। शहर में दिनों-दिन ई-रिक्शा की तादाद बढ़ रही है, लेकिन इनका पंजीकरण न होने से विभाग को राजस्व चूना लग रहा है। एआरटीओ और प्रशासन को गुमराह कर ट्रेड सर्टिफिकेट का दूसरे कामों में इस्तेमाल कर रहे कारोबारियों की खैर नहीं है। विभागीय स्तर से इनकी जांच के बाद कार्रवाई की तैयारी है।
एआरटीओ ने इन ट्रेड सर्टिफिकेट लेने वाले कारोबारियों से एक साल के भीतर कितने ई-रिक्शा की फरोख्त की है, उनके बिल और संख्या मांगी है। इससे इनमें हड़कंप मचा हुआ है। एआरटीओ राजीव कुमार बंसल ने बताया कि कुछ लोगों ने ट्रेड कारोबार का सर्टिफिकेट ले रखा है, लेकिन कार्य कुछ और कर रहे हैं। इन्हें सर्टिफिकेट ई-रिक्शा बेचने के लिए जारी हुए थे, जो ई-रिक्शा नहीं बेच रहे हैं। इन लोगों की जांच कराकर कार्रवाई होगी।