उन्होंने कहा कि आजकल इस तरह के बुर्के पहने जा रहे हैं, जिससे बदन चुस्त नजर आता है और जिस्म की नुमाईश होती है। इस्लाम में ऐसे कपड़ों को पहनना नाजायज और हराम बताया गया है, जिससे बदन की नुमाईश होती है।
कहा कि ऐसे बुर्कों पर पाबंदी लगनी चाहिए। मुफ़्ती असद क़ासमी ने कहा कि बुर्का फैशन नहीं बल्कि धर्म की पहचान है और इस्लाम में इसको लेकर जो हुक्म है वो यही है। बाकी हर इंसान स्वतंत्र है और सबकी अपनी सोच है कि उसके लिए क्या गलत और क्या सही है।