जिले में बहने वाली काली नदी के मैली हो जाने से लोग जानलेवा बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। नदी किनारे बसे गांवों के लिए दूषित पानी नासूर बन गई है। इसमें बह रहा प्रदूषित पानी आसपास की आबादी को बीमार कर रहा है। ग्रामीणों का दावा है कि नदी के कारण से हैंडपंपों का पानी भी दूषित हो गया है। इसे भी पीकर लोग बीमार पड़ रहे हैं। दूषित पानी से लोग कैंसर, किडनी, पेट और चर्म रोग से पीड़ित हो रहे हैं। रतनपुरी क्षेत्र के आधा दर्जन से ज्यादा गांव इन नदी का श्राप झेल रहे हैं।
जनपद में काली नदी का करीब 30 किलोमीटर लंबा क्षेत्र बुरी तरह प्रभावित है। इसमें कई पेपर मिल, शुगर मिल और डिस्टलरी का प्रदूषित पानी बहता है। नदी से तीन से पांच किमी की दूरी तक बसे गांवों के हालात ज्यादा खराब हैं। रतनपुरी क्षेत्र में नदी किनारे पर बसे गांव डबल, रतनपुरी, मोरकुक्का, मंडावली खादर, भनवाड़ा, कितास, इंचौड़ा, समौली आदि में कैंसर, किडनी, त्वचा रोग, एलर्जी, पेट में इंफेक्शन जैसी बीमारियों का प्रकोप है। बीते कुछ वर्षों में ही कैंसर के कारण इन गांवों के एक दर्जन से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है और कई बीमार हैं।
कैंसर से हो चुकी कई ग्रामीणों की मौत
रतनपुरी। पिछले एक वर्ष में डबल गांव में कैंसर से दर्जनभर लोगों की मौत हो चुकी है। मास्टर अतर सिंह पुत्र इलम सिंह, दलेराम पुत्र चंदुआ, इलमचंद पुत्र तिरखा, रामपाल पुत्र छोटा, छोटेलाल पुत्र बारू सिंह, श्रीचंद पुत्र छोटे, कमला पत्नी श्रीचंद, बेबी पत्नी मनोज, फुल्लो पत्नी खचेड़ू और ईश्वरी पत्नी ईश्वर आदि की कैंसर से मौत हो चुकी है। कई लोग अभी भी कैंसर से जूझ रहे हैं।
इनमें रूपीदमन पुत्र परमानंद, सतीश पुत्र जगदीश, विनोद कुमार पुत्र बलवंत और जयभगवान पुत्र श्याम सिंह और पवन पुत्र चंद्रभान आदि शामिल हैं। रतनपुरी में भी विभिन्न प्रकार के कैंसर से ग्रामीण टोमल पुत्र शिवचरण, श्याम सिंह पुत्र धर्मी, ओमप्रकाश शर्मा पुत्र दुर्गा प्रसाद, कमला पत्नी ओमप्रकाश शर्मा, सुरजा पुत्र चक्खन, दयावती पत्नी जगदीश आदि की मौत हो चुकी है। मंजू पत्नी देवेंद्र सिंह, रिछपाल पुत्र लक्ष्मण सिंह कैंसर से पीड़ित हैं। बीमारियों से पीड़ित लोगों का विभिन्न अस्पतालों में उपचार चल रहा है।
करीब दस वर्ष पूर्व साफ था नदी का पानी
रतनपुरी निवासी बुजुर्ग चमन सिंह, धनप्रकाश शर्मा, कुंवरपाल सिंह, राजकुमार शर्मा आदि बताते हैं कि करीब दस वर्ष पूर्व काली नदी का पानी काफी साफ हुआ करता था, लेकिन जैसे-जैसे इसके किनारे पर फैक्ट्रियां लगती गईं, नदी का पानी दूषित होता रहा।
वितरित किए थे वाटर फिल्टर
वर्ष 2016 में अमर उजाला ने डबल की स्थिति को प्रमुखता से उठाया था। मेरठ की नीर फाउंडेशन के अध्यक्ष रमन त्यागी ने डबल गांव में अमेरिकी एजेंसी की ओर से वाटर फिल्टर वितरित कराए थे, लेकिन यह भी कारगर नहीं हुए। अमेरिका की वाटर कलेक्टिव संस्था के दो सदस्य थॉमस शेबो और शेरॉन शेबो ने गत वर्ष 23 मार्च को डबल और मोरकुक्का गांव में पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया था।
उन्होंने डॉक्यूमेंट्री बनाकर डब्लूएचओ को भेजी थी। विनोद कुमार बताते हैं कि उन्हें गले के कैंसर की समस्या थी। ऑपरेशन कराना पड़ा। वह दूषित पानी को कैंसर के लिए जिम्मेदार बताते हैं। ग्राम प्रधान नरेश कुमार, धनेश त्यागी, अशोक कुमार, संजय कुमार, श्रीपाल त्यागी, लक्ष्मण सिंह आदि का कहना है कि दूषित जल के कारण काफी संख्या में ग्रामीण बीमारियों से जूझ रहे हैं।
प्रदूषण रोकने के लिए करेंगे आंदोलन
भाकियू के खतौली ब्लॉक अध्यक्ष कपिल सोम का कहना है कि इस मामले को जोरशोर से उठाया जाएगा। जल्द ही नदी में प्रदूषित पानी रोकने के लिए आंदोलन किया जाएगा। सिंचाई विभाग और डीएम कार्यालय पर धरना-प्रदर्शन कर समस्या की ओर ध्यान आकृष्ट कराया जाएगा।
दूषित पानी के अलावा कैंसर के लिए अन्य कई कारण हो सकता है। दूषित पानी के कारण पेट, त्वचा और किडनी से संबंधित रोग होते हैं। डबल और रतनपुरी गांवों का मामला उनके संज्ञान में है। इस संबंध में मेरठ मेडिकल कॉलेज को लिखा गया है - डा. पीसी मिश्रा, सीएमओ।
नदियों में प्रदूषित पानी डालने पर पूरी तरह रोक है। इसके लिए पूरी निगरानी की जा रही है। यदि कोई औद्योगिक इकाई फिर नदी में दूषित पानी डाल रही है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी - डीसी पांडेय, सहायक वैज्ञानिक, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड।