संवाद न्यूज एजेंसी
मुजफ्फरनगर। अदालत ने 3.30 करोड़ रुपये की नकली दवाएं बेचने के आरोपी कारोबारी तरुण गिरधर की जमानत अर्जी खारिज कर दी। विभागीय जांच में आरोपी की फर्म से बेची गई भारी मात्रा में कथित नकली दवाएं आगरा की फर्मों से खरीदी गई थी।
आयुक्त औषधि लखनऊ को मिली गोपनीय जांच पड़ताल के बाद आगरा से पूरे प्रदेश में नकली दवाओं का जखीरा आपूर्ति किए जाने की बात सामने आई थी। उनके निर्देश पर टीम ने 22 अगस्त से 31 अगस्त के बीच आगरा की फर्मों पर छापेमारी की।
वहां की विभिन्न फर्माें से करीब साढ़े तीन करोड़ रुपये की नकली औषधियां बरामद कर चार कारोबारियों को गिरफ्तार किया गया। आरोपियों से पूछताछ एवं अभिलेखों के जरिए मालूम हुआ कि इन फर्मों से बड़ी तादात में नकली औषधियां मुजफ्फरनगर की फर्म आयुष मेडिकोज गांधी कॉलोनी ने क्रय की है।
इसके बाद आलाकमान के आदेश पर 8 सितंबर को सहायक आयुक्त सहारनपुर मंडल दीपा लाल एवं जिला औषधि निरीक्षक पवन कुमार शाक्य ने जिले में टीम गठित की। अफसरों ने गांधी कॉलोनी स्थित तरुण गिरधर की फर्म पर गहनता से जांच की।
अभियोजन पक्ष ने तर्क रखा कि एक अप्रैल से 9 सितंबर तक आगरा की फर्मों से आरोपी की फर्म ने 36 प्रतिशत नेट लैस पर दवाओं का क्रय करना प्रथम दृष्टया नकली दवाओं की ओर इशारा करता है। आरोपी की फर्म से इसी अवधि में तीन करोड़ तीस लाख एक हजार सात सौ सैंतालिस रुपये की दवाओं का क्रय किया जाना पाया गया। बिक्रित दवाएं काउटर फिट/ नकली साबित हो चुकी है या जांच चल रही है।
प्रभारी सेशन न्यायाधीश रविकांत ने दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद आरोपी को जमानत देने से इंकार कर दिया। अदालत ने माना कि आरोपी प्रथम दृष्टया नकली दवाओं के क्रय-विक्रय करने में संलिप्त पाया गया है। जिससे आम जनमानस काे खतरे में पड़ने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता। आरोपी की करतूत से राजस्व को काफी नुकसान होना दर्शित है।