मुजफ्फरनगर। जनपद में फाइलेरिया (हाथी पांव) पीड़ित रोगियों की पहचान के लिए नाइट ब्लड सर्वे शुरू किया गया है। जिसके तहत रात के समय लोगों के खून के नमूने लेकर जांच कराई जा रही है। जनपद के प्रत्येक ब्लॉक के दो गांव से कम से कम 600 लोगों के खून के नमूने लिए जाने हैं। जांच में पॉजिटिव पाए गए लोगों को नि:शुल्क उपचार दिया जाएगा।
स्वास्थ्य विभाग फाइलेरिया की रोकथाम के लिए कदम उठा रहा है। इसके मद्देनजर शासन के निर्देश पर जनपद में नाइट ब्लड सर्वे कराया गया है। जिला मलेरिया अधिकारी अलका सिंह ने बताया कि जनपद के नौ ब्लाक से सर्वे के लिए 18 गांव का चयन किया गया है।
प्रत्येक गांव से कम से कम 300 लोगों के खून की जांच की जाएगी। एक ब्लॉक से कम से कम 600 और पूरे जनपद में छह हजार से अधिक लोगों की सैंपलिंग होनी है। सैंपलिंग के लिए शहर के रामपुरी, सुभाष नगर आदि मोहल्लों का भी चयन किया गया है।
15 से 20 साल तक शरीर में पड़ा रह सकता है पेरासाइट
जिला मलेरिया अधिकारी ने बताया कि यूपी के 51 जिले एंडेमिक (स्थानिक) माने जाते हैं, पश्चिमी यूपी के 24 जिले नॉन एंडेमिक जनपदों की सूची में शामिल हैं। उन्होंने बताया कि जनपद में फाइलेरिया नहीं है। यह जांचने के लिए कि कहीं यहां भी फाइलेरिया के लक्षण तो नहीं है, इसलिए अभियान चलाया जा रहा है।
बताया कि 18 साल से ऊपर के लोगों की माइक्रो फाइलेरिया की जांच कराई जाएगी। बताया कि इस बीमारी का पेरासाइट क्यूलेक्स मच्छर के काटने से पनपता है। यह शरीर में 15 से 20 साल पड़ा रह सकता है। इसलिए समय-समय पर अभियान चलाकर जांच कराई जाती है।
उन्होंने बताया कि यह सर्वे आमतौर पर रात आठ से 12 बजे के बीच किया जाता है, क्योंकि फाइलेरिया के परजीवी रात में ही रक्त में सक्रिय होते हैं। जिससे जांच में सटीक परिणाम मिलते हैं। दिन में यह परजीवी निष्क्रिय रहता है। रात के समय ही आशा कार्यकर्ता को घर-घर भेजकर ग्रामीणों को जांच के लिए बुलवाया जाता है।
दो ब्लॉक के इन 18 गांव में होगा नाइट ब्लड सर्वे
जिला मलेरिया अधिकारी अलका सिंह ने बताया कि जनपद के नौ ब्लाक के 18 गांव को सर्वे के लिए चुना गया है। उन्होंने बताया कि मोरना, हरिनगर, नावला, चरथावल देहात, शाहपुर, कुरथल, बघरा, मखियाली, चौरावाला, बसेड़ा, सराय रसूलपुर, दधेड़ू कला, सैदपुरा, काकड़ा, जौला, कवाल एवं वहलना में नाइट ब्लड सर्वे कराया जाएगा।