जिले में हजारों लोग अपने अंदर पल रही घातक बीमारियों से अनजान हैं। इन बीमारियों का पता तभी चलता है, जब ये अपने रक्त की जांच कराते हैं। ब्लड बैंक के रक्त दाताओं की जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद तो यही स्थिति बनी है। जिले में हेपेटाइटिस के मरीजों का बढ़ना खतरे का संकेत है। 20 हजार लोगों के रक्त की जांच में लगभग 500 रोगियों के सामने आने के बाद यह गणित भी जोड़ा जा रहा है कि 30 लाख की आबादी में कितने बीमार निकलेंगे।
जिले की आबादी लगभग 30 लाख है। दस प्रतिशत लोग ही ऐसे होंगे, जो किसी न किसी कारण से अपने ब्लड की जांच करा पाते हैं। 90 प्रतिशत लोग जांच के लफड़े में नहीं पड़ते हैं। जो लोग रक्तदान करते हैं, या मजबूरी में किसी रिश्तेदार, परिजन को ब्लड देने के लिए बदले में अपना ब्लड देते हैं, ऐसों की संख्या एक साल में लगभग 15 से 20 हजार के बीच होती है। ब्लड बैंक में बीते एक वर्ष में लगभग 20 हजार लोगों में से 500 घातक रोग के शिकार मिले हैं।
ऐसे में यह तो निश्चित हो गया है कि एक बड़ी संख्या में लोग अपनी बीमारियों से अनजान हैं। अज्ञानता के कारण अपने अंदर बीमारी पाल रहे हैं। यदि हम रक्तदाताओं के अनुपात में घातक बीमारियों के शिकार लोगों की संख्या को निकाले तो जिले में एड्स, हेपेटाइटिस के मरीजों की संख्या 75 हजार तक जा सकती है। बीस हजार में 500 तो एक लाख में ढाई हजार की संख्या बैठती है। दस लाख में 25 हजार का अनुपात आता है। ऐसे में जिला घातक रोगों को लेकर विस्फोटक स्थिति में दिखाई देता है।
हेपेटाइटिस की नि:शुल्क जांच की व्यवस्था हो
मुजफ्फरनगर। पूर्व सीएमओ और एड्स विभाग के प्रभारी डॉ वीके जौहरी का कहना है कि जिस तरह ब्लड में बीमारियां निकल रही हैं, इन हालातों को देखते हुए ब्लड की जांच के लिए भी अभियान चलाना पड़ेगा। जिस तरह एड्स की जांच नि:शुल्क हो रही है। इसी तरह हेपेटाइटिस की जांच के लिए भी केंद्र खोला जाना चाहिए।
ब्लड की जांच जरूर कराएं
मुजफ्फरनगर। ब्लड बैंक प्रभारी डॉ पीके त्यागी का कहना है कि हमें किसी भी बीमारी को लेकर घबराना नहीं चाहिए। बीमारी का अच्छी तरह से उपचार कराना चाहिए। जिस तरह लोगों में सामान्य रूप से बीमारियां निकल रही हैं, ऐसे में प्रत्येक व्यक्ति को अपने ब्लड की जांच करानी चाहिए। जो व्यक्ति उनके यहां रक्तदातन करता है, उसकी पांच गंभीर बीमारियों की जांच नि:शुल्क होती है। ब्लड की जांच से यह तो स्पष्ट हो जाएगा कि बीमारी है या नहीं। समय पर बीमारी का पता चलने पर वह कंट्रोल भी हो जाती है।