सिखेड़ा क्षेत्र के गांव चितौड़ा झाल पर सिंचाई विभाग की करीब 150 बीघा भूमि पर बीस किसानों ने कब्जा कर रखा था। सिंचाई विभाग की टीम ने भूमि पर खड़ी फसल को खुर्दबुर्द करा कब्जामुक्त करा लिया। अधिकारियों ने भूमाफिया को चेताया कि दोबारा से भूमि पर कब्जा किया तो उनके विरुद्ध गुंडा एक्ट की कार्रवाई की जाएगी।
चितौड़ा झाल पर गंगनहर के पास सिंचाई विभाग की डेढ़ सौ बीघा भूमि खाली पड़ी हुई थी। सिंचाई विभाग कई वर्ष पूर्व इस भूमि को गांव चितौड़ा के रहने वाले शहजाद, गोपाल, गय्यूर अली, विनोद कुमार, सुरेश कुमार, निसार अली, कर्म सिंह, अमर सिंह, मंजू, मुन्ना, नारायण आदि बीस लोगों को पट्टे पर दी थी।
ग्रामीणों के पट्टों की समयावधि 2011 को समाप्त हो गई थी। लेकिन इन ग्रामीणों ने भूमि खाली करने के बजाए जबरदस्ती कब्जा कर फसल बोते चले आ रहे हैं। प्रशासन ने कई बार बल प्रयोग करके इस भूमि का इन भूमाफिया से खाली भी कराया था। इसके बावजूद दोबार से भूमि पर कब्जा कर लिया था।
केंद्रीय जल संसाधन राज्यमंत्री डॉ. संजीव बालियान द्वारा क्षेत्र को एक कृषि अनुसंधान केंद्र बनाने के लिए चितौड़ा झाल की इस भूमि का चयन किया गया था। सिंचाई विभाग ने इस कृषि भूमि को कब्जामुक्त कराने के लिए चार जून को ग्रामीणों को नोटिस भेजा था। नोटिस में 22 जून तक भूमि खाली कराने चेतावनी दी गई थी।
इसके बावजूद इन्होंने भूमि को कब्जामुक्त नहीं की थी। बृहस्पतिवार को मेरठ प्रथम सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता प्रमोद शर्मा के नेतृत्व में विभागीय टीम, पुलिस बल के साथ चितौड़ा झाल पर भूमि खाली कराने पहुंचे। कुछ किसानों ने अपनी फसल काट ली बाकी फसल को जेसीबी मशीन से खुर्दबुर्द कर दी गई। सहायक अभियंता ने बताया कि सिंचाई विभाग की 150 बीघा भूमि खाली करा ली गई है।