स्थानीय निकाय चुनाव में दावे और आपत्तियों के लिए बूथों पर बीएलओ की तैनाती प्रशासन के लिए परेशानी का सबब बन गई। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के विरोध के चलते प्रशासन को लेखपालों, अमीनों, प्रेरकों और शिक्षकों का सहयोग लेना पड़ा। इसके बावजूद सभी 288 बूथों पर बीएलओ तैनात नहीं किए जा सके। इस कारण आम जनता को परेशानियों का सामना करना पड़ा।
चुनाव आयोग के निर्देश पर नगर निकायों में वोटों के परिवर्धन, अपमार्जन और संशोधन के लिए बीएलओ की तैनाती की गई। शहर में 288 बीएलओ तैनात किए जाने थे। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के विरोध के चलते जिला प्रशासन की तैयारी अचानक खटाई में पड़ गई। आयोग ने 15 मई की तिथि दावे और आपत्तियों के लिए तय की हुई थी। एडीएम वित्त को तहसील में बैठकर अमीनों, लेखपालों, प्रेरकों और कुछ शिक्षकों को बूथों पर भेजना पड़ा।
इसके बाद बीएलओ कम रह गए तो मतदान केंद्रों पर दो-दो बूथ पर एक-एक बीएलओ को बैठाना पड़ा। दावे और आपत्तियां एकत्र कराए गए। समय से मतदाता सूची नहीं मिलने से लोग आपत्तियां भी नहीं कर सके। आम जनता को इससे परेशानियों का सामना करना पड़ा। एडीएम वित्त सुनील सिंह ने बताया कि यदि किसी का वोट नहीं बन पाया है तो उसे परेशान होने की जरूरत नहीं है। 25 को अंतिम सूची प्रकाशन के बाद भी वोट बनवाने का मौका दिया जाएगा।
वार्ड से 380 वोट गायब
मुजफ्फरनगर। निकाय में 50 वार्ड बन जाने के बाद जो वोटों का बंटवारा हुआ है। बंटवारे के बाद सूची का जो प्रकाशन हुआ, उसमें कुछ वार्डों में सैकड़ों वोट गायब हैं। वार्ड 29 गांधी कालोनी के पवन कुमार ने बताया कि उनके वार्ड के 380 वोट गायब हैं। इसी तरह अन्य वार्डों से ही शिकायतें मिल रही हैं।