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भागवत मोक्ष ग्रंथ और शुकतीर्थ मुक्ति की धरा: ओमानंद

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शुकदेव आश्रम में स्वामी कल्याणदेव की 18वीं पुण्यतिथि पर भागवत प्रवक्ता आशीष मिश्रा कथा का शुभारं? - फोटो : MUZAFFARNAGAR
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- स्वामी कल्याणदेव की 18वीं पुण्यतिथि पर कथा का शुभारंभ
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- शुकदेव आश्रम में 14 जुलाई को मुख्य श्रद्धांजलि समारोह
संवाद न्यूज एजेंसी
मोरना (मुजफ्फरनगर)। शुकतीर्थ के जीर्णोद्धारक, तीन सदी के युगदृष्टा, शिक्षाऋषि, ब्रह्मलीन परम पूज्य वीतराग स्वामी कल्याण देव जी महाराज की 18वीं पुण्यतिथि पर महान संत की स्मृति में श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का शुभारंभ वेद मंत्रोच्चार से किया गया। पीठाधीश्वर स्वामी ओमानन्द ने कहा कि भागवत मोक्ष ग्रंथ और शुकतीर्थ मुक्ति की धरा है।
भागवत पीठ श्री शुकदेव आश्रम, शुकतीर्थ स्थित वीतराग स्वामी कल्याणदेव के समाधि मंदिर में कथा व्यास आचार्य आशीष मिश्रा के कथा सप्ताह का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलित और पोथी पूजन कर पीठाधीश्वर स्वामी ओमानंद महाराज ने किया। उन्होंने कहा कि पूज्य गुरुदेव ने शुकतीर्थ का जीर्णोद्धार कर लोक कल्याण का स्तुत्य कार्य किया है। भागवत कथा ज्ञान यज्ञ तथा ऋषि मुनियों की आध्यात्मिक चेतना से संपूर्ण जीवों के कल्याण का मार्ग प्रशस्त होता है। भागवत के ज्ञान से मोक्ष की प्राप्ति होती है। भगवान ने स्वयं ही व्यास पुत्र शुकदेव जी के रूप में शुकतीर्थ में प्रगट होकर धर्म चक्रवर्ती सम्राट महाराजा परीक्षित को श्रीमद्भागवत कथामृत का पान कराकर मोक्ष प्रदान किया था। मनुष्य जब अपने आप को मन और शरीर से भिन्न आत्मतत्व के रूप में अनुभव करता है, तो इसी को मोक्ष कहते हैं। मन ही मनुष्य के बंधन और मोक्ष का मुख्य कारण है।
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कथा व्यास आचार्य आशीष मिश्रा ने कहा की आज आदमी अपने दु:ख से कम दु:खी और दूसरों के सुख से ज्यादा दु:खी है। हमारे शास्त्रों ने इसे मत्सर भाव कहा है। उन्होंने बताया कि 14 जुलाई को महान संत की 18वीं पुण्यतिथि पर मुख्य श्रद्धांजलि समारोह होगा, जिसमें शिक्षा ऋषि के अनुयायी, भागवत श्रद्धालु शुकतीर्थ पधारेंगे। ट्रस्ट मंत्री कुंवर देवराज पंवार, स्वामी भरत देव, नेपाल से पधारे श्री शुकदेव संस्कृत विद्यालय के पूर्व प्रधानाचार्य ज्ञान प्रसाद, प्रधानाचार्य गिरीश चंद्र उप्रेती, आचार्य विकास, आचार्य प्रदीप, आचार्य अरुण, आचार्य धीरेंद्र, आचार्य युवराज, ठाकुर प्रसाद, छात्रगण तथा भक्तगण आदि मौजूद रहे।
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