खतौली। एनएच-58 पर भैंसी कट काल बनकर घरों के चिराग बुझा रहा है। पिछले तीन दिनों में पांच लोग जान गंवा चुके हैं।
नगर में ट्रैफिक के दबाव को देखते हुए सन 2010 में भंगेला से नावला कोठी के बीच बाईपास बनाया गया था। भारी वाहनों का दबाव दो स्थानों पर बंटने के बावजूद खतौली की सड़कें खून से अपनी प्यास बुझा रही हैं। एनएच-58 के भैंसी कट पर हौलनाक हादसों का सिलसिला जारी है।
हर बार ओवरलोड वाहन या अज्ञात वाहन हादसों का कारण बन रहे हैं। आरटीओ महकमा ओवरलोड वाहनों को रोकने की हिमाकत नहीं करता। चार फरवरी को भैंसी कट पर ओवरलोडिंग ट्रक ने मेरठ-अंबाला प्राइवेट बस में टक्कर मार दी थी, जिसमें सवार दो छात्रा कशिश और दिव्या कटारिया की मौके पर ही मौत हो गई थी।
बस में सवार करीब तीन दर्जन यात्री घायल हो गए थे। 24 फरवरी को नेशनल हाईवे पर कैफे के निकट ओवरलोड डीसीएम ने बाइक में टक्कर मार दी थी। हादसे में बाइक सवार भैंसी निवासी मां सुमन और बेटे सागर की मौत हो गई थी।
गुरुवार देर रात भैंसी कट के पास अज्ञात वाहन ने टक्कर मारकर बाइक सवार रुड़की निवासी कुमार गौरव और उसके दोस्त तरुण चौहान को मौत के घाट उतार दिया। इनके अलावा एक सप्ताह पूर्व मंसूरपुर क्षेत्र में हाईवे पर कैंटर ने गन्ने से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉली में टक्कर मार दी थी।
जिसमें किसान राजकुमार की मौके पर ही मौत हो गई थी। इस तरह फरवरी के 25 दिनों के भीतर हाईवे पर दुर्घटनाओं में सात लोगों की मौत के साथ ही दर्जनों लोग घायल हो चुके हैं।