गोबर के उत्पाद से बनाईं आकर्षक राखियां
मुजफ्फरनगर, चरथावल। रक्षाबंधन के पावन पर्व में स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं ने गाय के गोबर से राखियां बनाई हैं। स्वावलंबी बनने की दिशा में स्वदेशी उत्पाद बनाकर ग्रामीण परिवेश की महिलाओं की दिलचस्पी बेमिसाल है। कम संसाधनों में रोजगार जुटाकर ब्लॉक के अनेकों समूहों से जुड़ी महिलाएं और युवतियां लगी हैं।
ज्ञानामाजरा राजपूतनान गांव में दुर्गा महिला स्वयं सहायता समूह की महिलाओं द्वारा हर उत्सव पर देशी अंदाज में उत्पाद बनाने का जुनून है। पांच साल से संचालित इस समूह ने गाय के गोबर से निर्मित चमचमाती राखियों सजाकर बाजार में उतारा है। अध्यक्ष सुमन देवी बताती हैं कि गांवों में इस बार तीन से 15 रुपये तक की राखियां की डिमांड ज्यादा रही। राखियों में बहनों के अटूट प्यार को समाहित किया है। मिक्सी में गोबर का चूरा बनाकर लोबान और सफेद चंदन के चूरे का मिश्रण राखियों में खुशबू महकाता है। गोबर निर्मित सुंदर डिजाइन में तैयार राखियां ब्लॉक कार्यालय प्रांगण में बिक्री के लिए सजाई गईं थीं। पूर्व प्रधान एवं समूह के मार्गदर्शक कंवरपाल सिंह बताते हैं कि विकास खंड क्षेत्र में इस तरह की राखियां दूसरी बार बनाई गई है। कच्चा माल ऊन, कलावा, मोती, लोबान आदि थानाभवन और शामली से लाया गया है।
समूह 11 स्वयं सहायता समूह की महिलाएं
समूह से अध्यक्ष सहित 11 महिलाएं मंजू देवी, रश्मि वर्मा, रेखा, बबीता, बॉबी, सुमन, राजेश, पूनम, मोनी, राजेश जुड़ी है। उनका कहना है पिछले वर्ष चीन से हुए विवाद के बाद स्वदेशी राखियां बनाने के लिए मन में ठानी थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भारत को आत्मनिर्भर बनाने के नारे से उन्हें मोटिवेशन मिला है। नया करने के लिए उनका समूह हरदम प्रयासरत है। राखियों के अलावा टेडीबियर, देशी गोबर से सुगंधित धूपबत्ती, कान्हा का सोफा, पगड़ी, कान्हा की ड्रेस और जवें आदि तैयार करती है।
वर्जन
ब्लॉक मिशन मैनेजर संदीप कुमार ने बताया विकास खंड क्षेत्र में कई समूह राखियां बनाई हैं। दुर्गा स्वयं सहायता समूह द्वारा गोबर निर्मित राखियों के अलावा अन्य उत्पादों की जिला मुख्यालय पर सराहा जा चुका है। ब्लॉक के अनेक समूह त्योहारों पर स्वदेशी सामान बनाकर रोजगार की तरफ बढ़ रहे हैं।
चरथावल के ज्ञानामाजरा में समूह द्वारा तैयार की गई आकर्षक राखियां- फोटो : MUZAFFARNAGAR