नई मंडी के रामलीला मैदान में गुड बेचते व्यापारी।
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मुजफ्फरनगर। कृषि कानून के लागू होते ही एशिया की सबसे बड़ी गुड़ मंडी मुजफ्फरनगर पर खतरे के बादल मंडराने लगे हैं। यहां किसानों ने मंडी से बाहर गुड़ बेचना शुरू कर दिया है। किसानों को मंडी में गुड़ बेचने पर ढाई प्रतिशत टैक्स देना होगा। जबकि मंडी से बाहर बिक्री पर कोई टैक्स नहीं देना है।
शुक्रवार को रेलवे स्टेशन के बराबर में स्थित रामलीला मैदान में कुछ व्यापारियों ने किसानों से गुड़ की खरीद की। पहले दिन ही यहां काफी मात्रा में गुड़ पहुंचा है। इस मैदान में गुड़ बेचने वाले किसान को मंडी शुल्क नहीं देना है। मंडी में कोल्हू संचालक गुड़ बेचेगा तो उसे ढाई प्रतिशत का टैक्स देना होगा। मंडी से बाहर देश में कहीं भी माल बेचने पर कोई टैक्स नहीं देना है। इससे पहले कानून के अनुसार मंडी से बाहर माल बेचने पर कानूनी कार्रवाई होती थी, नये कानून में किसान को कहीं भी माल बेचने की छूट है। इसका असर मुजफ्फरनगर में दिखाई देने लगा है।
गुड़ बेचने आए रमेश कश्यप का कहना है कि अब हम लोगों को छूट मिल गई है, हम कहीं भी अपना माल बेच सकते हैं। अब कोई अधिकारी किसी किसान या कोल्हू संचालक को रोक नहीं पाएगा। गुड़ मंडी के मंत्री श्याम सिंह सैनी का कहना है कि प्रदेश सरकार व्यापारी लगातार मांग कर रहे हैं कि प्रदेश में मंडी शुल्क समाप्त किया जाए। यदि मंडी शुल्क समाप्त नहीं हुआ तो वे व्यापारी बर्बाद हो जाएंगे, जिन्होंने पैसा खर्च कर यहां दुकान ले रखी है। किसान मंडी में माल क्यों बेचेगा, जब बाहर बिना टैक्स के उसका माल बिकेगा।