2002 में बघरा सीट से पहुंची थीं विधानसभा
साल 2002 में अनुराधा चौधरी रालोद के टिकट पर बघरा सीट से चुनाव जीतकर पहली बार विधानसभा पहुंची थी। समाजवादी पार्टी के उदयपाल को हार का सामना करना पड़ा था। प्रदेश सरकार में उन्हें कैबिनेट मंत्री बनाया गया।
लेकिन 2004 के लोकसभा चुनाव में कैराना सीट से जीतकर वह सांसद बन गईं। बघरा में उपचुनाव हुआ तो परमजीत मलिक चरथावल के वर्तमान विधायक पंकज मलिक को हरा दिया था।
2009 में भाजपा-रालोद गठबंधन हुआ। अनुराधा ने मुजफ्फरनगर सीट से चुनाव लड़ा, लेकिन बसपा के कादिर राना के सामने वह हार गई थी। साल 2011 आते-आते दिवंगत चौधरी अजित सिंह की कांग्रेस से नजदीकियां बढ़ी और बाद में वह केंद्र सरकार का हिस्सा बन गए।
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2012 में थामा सपा का दामन
2012 में सूबे में सपा की सरकार बनने के बाद अनुराधा चौधरी रालोद से सपा में शामिल हो गई। उनका बिजनौर से टिकट भी तय हो गया था, लेकिन सपा के स्थानीय नेताओं के हस्तक्षेप के कारण टिकट काट दिया गया। यही वजह है कि अनुराधा 2014 के लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा में शामिल हो गई।
पिछले करीब नौ साल से अब वह भाजपा में है। कभी मुजफ्फरनगर तो कभी बिजनौर से टिकट की दावेदार है। मीरापुर सीट अगर जाट प्रत्याशी के हिस्से में आती तो भाजपा के कोटे से अनुराधा चौधरी का नाम भी चर्चा में था।