मुजफ्फरनगर। कृषि विभाग ने खरीफ फसलों में कीटों और रोगों के प्रकोप को देखते हुए किसानों के लिए एडवाइजरी जारी की है। बासमती धान के निर्यात मानकों के लिए 11 रासायनिक दवाओं पर प्रतिबंध की घोषणा है। जिला कृषि अधिकारी राहुल तेवतिया ने बताया कि किसानों को धान और गन्ने की सुरक्षा के लिए सुझाव भी दिए गए हैं।
सरकार ने बासमती चावल की गुणवत्ता सुधारने और अंतरराष्ट्रीय बाजार के कड़े मानकों को पूरा करने के लिए 11 रासायनिक दवाओं को प्रतिबंधित किया है। प्रदेश के 30 प्रमुख बासमती उत्पादक जिलों में यह प्रतिबंध लागू है। प्रतिबंधित दवाओं में ट्राइसाइक्लाजोल, बुप्रोफेजिन, एसीफेट, क्लोरपायरीफॉस, टेबुकोनाजोल, प्रोपिकोनाजोल, थायोसेथॉक्साम, प्रोफेनोफॉस, इमिडाक्लोप्रिड, कार्वेडाजिम और कार्बोफ्यूरान शामिल किए गए हैं।
कृषि विभाग ने किसानों से फसलों की नियमित निगरानी करने और आवश्यकतानुसार अनुशंसित दवाओं का प्रयोग करने की अपील की है। धान में झुलसा, शीथ ब्लाइट और ब्लास्ट जैसे रोगों की नियमित निगरानी करें। इनके नियंत्रण के लिए हेक्साकोनाजोल जैसे रसायनों का छिड़काव करें।
जीवाणु झुलसा रोग के लिए स्ट्रेप्टोमाइसिन सल्फेट और कॉपर ऑक्सीक्लोराइड का प्रयोग करें। तना छेदक और पत्ती लपेटक कीटों की निगरानी हेतु फेरोमोन ट्रैप लगाएं। इनके रासायनिक नियंत्रण के लिए बाईफेथ्रिन या क्लोरेनट्रानिलीप्रोल का छिड़काव करें।
फुदका कीट के प्रकोप पर फिप्रोनिल या एजाडिरेक्टिन का प्रयोग करें। कीटों की संख्या बढ़ने पर कृषि विभाग के क्षेत्रीय कर्मचारियों से संपर्क कर उचित सलाह प्राप्त करें।
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इस तरह गन्ने की देखभाल करें किसान
गन्ने की फसल में टॉप बोरर, पाइरिल्ला, सफेद मक्खी और अन्य रस चूसक कीटों की नियमित निगरानी आवश्यक है। टॉप बोरर के जैविक नियंत्रण के लिए ट्राइकोग्राम केलोनिस का तीन बार प्रयोग करें। रासायनिक नियंत्रण के लिए क्लोरोपायरीफास का छिड़काव प्रभावी है। पाइरिल्ला के प्राकृतिक नियंत्रण के लिए मित्र कीट एपिरिकेनिया मेलोनोलुका का संरक्षण करें। रासायनिक उपचार के लिए एसीफेट और इमिडाक्लोप्रिड का प्रयोग किया जा सकता है।