देवबंद (सहारनपुर)। विश्वविख्यात इस्लामिक शिक्षण संस्था दारुल उलूम की सुप्रीम पावर मजलिस-ए-शूरा ने देशभर के छात्रों को राहत पहुंचाने वाला फैसला लिया है। कोरोना काल की वजह से पिछले छह माह से बंद दारुल उलूम को नवंबर माह में खोलने पर सहमति बनी है, साथ यह निर्णय लिया कि कोरोना की वजह से फिलहाल किसी भी बाहरी छात्र का प्रवेश नहीं होगा। सिर्फ देवबंद और उस्तादों के बच्चों का ही दाखिला लिया जाएगा। हालांकि तीन चरणों की मैराथन बैठक में वार्षिक बजट समेत कई अहम फैसलों पर अभी कोई फैसला नहीं लिया गया।
दारुल उलूम के मेहमानखाने में तीन दिवसीय मजलिस-ए-शूरा की बैठक के दूसरे दिन तीन चरण पूरे होने के बाद संस्था के वार्षिक बजट सहित कई अहम फैसलों पर शूरा सदस्य एकमत नहीं हुए। इस कारण बैठक में कोई फैसला नहीं लिया जा सकता। हालांकि देशभर के छात्रों को राहत पहुंचाने वाले संस्था को खोले जाने के फैसले पर सभी सदस्य एकमत दिखाई दिए और उन्होंने सरकार की गाइड लाइन आने पर स्वास्थ्य मंत्रालय के निर्देशानुसार 10 नवंबर से दारुल उलूम को खोले जाने पर सहमति जताई।
शूरा सदस्यों ने वित्तीय वर्ष 2020-21 के लिए संस्था के वार्षिक बजट को संतुलित बनाने को लेकर एकाउंट विभाग के कर्मचारियों और दिल्ली से बुलाए सीए के साथ काफी देर तक विचार मंथन किया, लेकिन बजट पारित नहीं किया। इतना ही नहीं शूरा सदस्यों ने एकाउंट विभाग में पहुंचकर वहां पपत्रों की जांच भी की। वार्षिक बजट, सदर मुदर्रिस व शेखुल हदीस के पद पर नियुक्ति, निर्माण संबंधी प्रस्ताव समेत कई अहम फैसलों पर तीन चरण पूरे होने के बाद भी कोई निर्णय नहीं लिया गया। माना जा रहा है कि सभी अहम फैसले बुधवार को होने वाली बैठक में लिए जाएंगे।
बैठक में यह लोग रहे शामिल
देवबंद। दारुल उलूम के मोहतमिम मौलाना मुफ्ती अबुल कासिम नोमानी, असम के सांसद मौलाना बदरुद्दीन अजमल, पूर्व मोहतमिम मौलाना गुलाम मोहम्मद वुस्तानवी, मौलाना अब्दुल अलीम फारुकी, मौलाना शफीक बेंगलूर, मौलाना अनवारुल हक, मौलाना रहमतुल्लाह कश्मीरी, सैयद अंजर हुसैन मियां साहब, मौलाना महमूद, मौलाना इस्माईल मालेगांव, मौलाना आकिल सहारनपुरी, हकीम कलीमुल्लाह, मौलाना निजामुद्दीन, मौलाना मलिक मोहम्मद इब्राहीम, सैयद हबीब अहमद, मौलाना मलिक कश्मीरी बैठक में मौजूद रहे।
मोहतमिम को लेकर भी हो सकता है फैसला
देवबंद। मजलिस-ए-शूरा की बैठक में सदर मुदर्रिस और शेखुल हदीस पद को लेकर विचार करने के बाद कोई फैसला नहीं हो सका। माना जा रहा है कि जमीयत उलमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी को सदर मुदर्रिस की जिम्मेदारी दी जा सकती है, जबकि शेखुल हदीस पद के लिए मौलाना मुफ्ती हबीबुर्रहमान आजमगढ़ी का नाम चर्चाओं में है। वहीं, यह चर्चा भी जोरों पर है कि मोहतमिम को लेकर शूरा सदस्य कोई बड़ा फैसला ले सकते हैं। कहा जा रहा है कि मोहतमिम को उक्त पदों में से किसी एक की जिम्मेदारी दी जा सकती है। जबकि मोहतमिम का दायित्व किसी ओर को दिया जा सकता है।
देर रात्रि मजलिस-ए-शूरा की बैठक से बाहर निकलते दारुल उलूम के मोहतमिम मौलाना अबुल कासिम नोमानी- फोटो : DEVBAND