एमडीए में बिना नियुक्ति के लेखाकार बने दैनिक वेतनभोगी मैट भुवाल सिंह को हटा दिया गया है। 21 साल पहले प्राइवेट व्यक्ति को एमडीए के अफसरों ने वित्तीय कार्यों की जिम्मेदारी सौंप रखी थी। सोमवार को दफ्तर खुला तो एमडीए वीसी एवं डीएम राजीव शर्मा ने उन्हें हटाने का फरमान जारी किया। मैट भुवाल सिंह को ट्रांसफर कर खतौली एमडीए कार्यालय से अटैच कर दिया गया है।
एमडीए में हो रहे गड़बड़झाले का खुलासा अमर उजाला ने नौ जून के अंक में किया था। दो दिन सरकारी दफ्तरों में अवकाश रहा। सोमवार को एमडीए खुला तो फर्जी तरीके से मानकों के विरुद्ध सहायक लेखाकार बने भुवाल सिंह पर डीएम की गाज गिर गई। एमडीए अफसरों की धींगामस्ती की वजह से दैनिक वेतन भोगी मैट विभाग में रौब रुआब से नौकरी करता रहा। उसके बारे में किसी को भी दैनिक वेतनभोगी कर्मी होने की भनक तक नहीं थी।
एमडीए के अधिकारियों और कर्मचारियों ने भी मौन धारण कर रखा था। भुवाल सिंह जेई है या लेखाकार है, इस मुद्दे पर एमडीए का अंदरुनी सच कभी सामने नहीं आया। इंटरमीडिएट और डिप्लोमा इन इलेक्ट्रिकल की योग्यता का धारक व्यक्ति आखिर किस प्रयोजन के लिए एमडीए में डेलीवेजिज पर मैट रख लिया गया? मैट पद का काम करने के बजाय उन्होंने विभाग के भूमि, नक्शा, सर्किल रेट, भवन शुल्क और कॉमर्शियल निर्माण से जुड़े कार्यों में सहभागिता बढ़ा ली।
फायदे के फेर में अफसर भी अनदेखी करते रहे। बात की पुष्टि उसके एमडीए में वजूद को साबित कर रही है। अभियंत्रण लिपिक कक्ष में भुवाल सिंह को अलग कमरा दिया गया। उन पर सभी वित्तीय फाइलें देखने की जिम्मेदारी थी। बोर्ड की गोपनीय बैठक में भी उसे कार्रवाई लिखने का जिम्मा सौंप दिया गया। ऐसे उपभोक्ताओं की भी कमी नहीं है जो मैट के शोषण के शिकार बने हैं।
आरोप है कि एमडीए के ठेकेदारों से मैट का सीधा लेनदेन रहा। बिना विधिक योग्यता के उन्हें लेखाकार बनाए जाने के लिए तत्कालीन वीसी विनोद यदुवंशी को जिम्मेदार ठहराया गया है। फिलहाल एमडीए वीसी का चार्ज डीएम राजीव शर्मा पर है। मामले के खुलासे के बाद डीएम ने मैट को लेखा विभाग से हटा दिया है। कार्रवाई की पुष्टि एमडीए के सचिव राजवीर सिंह मावी ने की है। मावी ने बताया कि मैट भुवाल सिंह को मुख्यालय से हटाकर खतौली एमडीए कार्यालय पर अटैच कर दिया गया है।