मुजफ्फरनगर। तीन साल पहले तितावी थाना क्षेत्र के गांव में नौ साल के बच्चे के साथ कुकर्म के मामले में दोषी ललित को अदालत ने 20 साल की सजा सुनाई है। अपर सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट) कोर्ट की न्यायाधीश आरती फौजदार ने फैसला सुनाया।
डीजीसी फौजदारी राजीव शर्मा, सहायक शासकीय अधिवक्ता फौजदारी प्रदीप बालियान और विक्रांत राठी ने बताया कि 12 अक्तूबर 2019 को नौ साल का बच्चा घर पर अकेला था। उसकी मां जंगल में घास लेने गई थी, जबकि पिता ड्यूटी पर थे। पड़ोस के ही आरोपी ललित ने घर में घुसकर बच्चे के साथ कुकर्म किया।
पीड़ित की मां जंगल से घास लेकर लौटी तो मामले की जानकारी दी। 15 अक्तूबर को तितावी थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। प्रकरण की सुनवाई अपर सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट) कोर्ट संख्या-1 आरती फौजदार ने की। अदालत ने अभियुक्त पर दोष सिद्ध करते हुए पॉक्सो एक्ट में 20 साल की सजा और 25 हजार रुपये अर्थदंड, धारा 377 में सात साल की सजा और पांच हजार रुपये अर्थदंड, धारा 452 में पांच साल सजा और तीन हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है।
नकली नोट के मामले में चार साल की सजा सुनाई
मुजफ्फरनगर। शामली में नकली नोट के साथ पकड़े गए दोषी को अदालत ने चार साल की सजा सुनाई है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश कोर्ट संख्या-10 के न्यायाधीश कमलापति प्रथम ने फैसला सुनाया। डीजीसी राजीव शर्मा और एडीजीसी कुलदीप कुमार ने बताया कि शामली कोतवाली पुलिस ने 11 जून 2007 को मेरठ के फलावदा थाना क्षेत्र के सनौता निवासी प्रवेज और उसके साथियों को नकली नोटों के साथ पकड़ा था। आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। सुनवाई के दौरान प्रवेज की पत्रावली अलग कर दी गई। अदालत ने आरोपी को धारा 489ग में दोषी माना। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश कोर्ट संख्या-10 के न्यायाधीश कमलापति प्रथम ने अभियुक्त को चार साल की सजा और 20 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया है। ब्यूरो