सहारनपुर। पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) की करेंसी चेस्ट में मिले 17.29 करोड़ रुपये के जाली नोट प्रकरण की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, आरोपियों की पुरानी गतिविधियां भी सामने आ रही हैं। रविवार को एनआईए के हत्थे चढ़ा आरोपी मुकेश पहले भी जाली नोट के मामले में जेल जा चुका है। वह दिल्ली रोड स्थित हसनपुर कदीम मनोहरपुर गांव में परिवार के साथ रहकर कपड़े सिलाई का काम करता है।
आरोपी मुकेश मूलरूप से सरसावा क्षेत्र के गांव कुतुबपुर का रहने वाला है। वह करीब 26 साल पहले गांव से शहर आ गया था। पहले मनोहरपुर गांव में किराए के मकान में रहा। इसके बाद उसने खुद का अपना मकान बना लिया था। परिवार में पत्नी और एक बेटा है। उसने घर के पास ही कपड़े सिलाई के लिए दुकान किराए पर ले रखी है, जिसमें वह अपनी पत्नी मिथलेश और बेटे के साथ काम करता है। खुद का करीब 37 गज का मकान है। सितंबर 2024 में आरोपी मुकेश पुराने जाली नोट के एक मामले में जेल जा चुका था। तब थाना कुतुबशेर पुलिस ने गिरफ्तार किया था।
अब 17.29 करोड़ रुपये के जाली नोट प्रकरण में एनआईए की टीम ने आरोपी मुकेश कुमार को पकड़ा है, जो आरोपी आदेश चौधरी का करीबी सहयोगी है। उससे पूछताछ कर जाली नोटों के नेटवर्क और करेंसी चेस्ट से जुड़े संपर्कों के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है। जांच एजेंसी यह पता लगाने में लगी है कि मुकेश की इस प्रकरण में भूमिका क्या थी और वह किन लोगों के संपर्क में था। वहीं, मुकेश की पत्नी मिथलेश का कहना है कि पति ने कभी इसका जिक्र नहीं किया। उधर, एसपी सिटी व्योम बिंदल का कहना है कि एनआईए ने ही इन दोनों आरोपियों को पकड़ा है। पूछताछ में क्या आया इसकी जानकारी नहीं है।
मृतक आश्रित में मिली थी आरोपी राजेंद्र को नौकरी
एनआईए की टीम ने आरोपी मुकेश के साथ राजेंद्र निवासी कल्याणपुर थाना सरसावा को भी पकड़ा था। वह करीब 15 साल पहले गांव से शहर आ गया था। पिता रेलवे में कार्यरत थे। उनकी मौत के बाद राजेंद्र को मृतक आश्रित में नौकरी मिल गई थी। तीन भाइयों में वह सबसे बड़ा है। बताया जा रहा है कि पिछले साल उसने अपनी बेटी की शादी की थी।
चार आरोपी गिरफ्तार, नोटों का स्रोत अब भी पहेली
करेंसी चेस्ट प्रकरण में अब तक चार आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। जांच एजेंसियां बैंक से जुड़े कर्मचारियों के साथ ही बाहरी लोगों की भूमिका भी खंगाल रही हैं। 17.29 करोड़ रुपये के जाली नोटों का मामला सामने आने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही बना हुआ है कि इतनी बड़ी मात्रा में जाली नोट करेंसी चेस्ट तक पहुंचे कैसे। एनआईए इस बिंदु पर भी जांच कर रही है कि जाली नोटों की खेप कहां तैयार हुई, किसके माध्यम से यहां पहुंची और इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे। आरोपियों से पूछताछ के बाद इस नेटवर्क की कड़ियां जुड़ने की उम्मीद है। फिलहाल जाली नोटों के असली स्रोत का पता नहीं चल सका है।