उत्तर प्रदेश जल निगम की योजना के तहत जिले में संचालित पेयजल योजनाओं के रखरखाव के लिए 2015-16 में प्रदेश सरकार ने सभी जिलों को तीन अरब 65 करोड़ 59 लाख 28 हजार रुपया जारी किया था।
इसमें मुजफ्फरनगर जिले के लिए 7 करोड़ 86 लाख 79 हजार जारी हुए। जिला स्तरीय पेयजल समिति की बैठक में पैसे का हिसाब मांगा गया तो विभागीय अधिकारी कोई संतोषजनक उत्तर नहीं दे पाए। इस पर सीडीओ ने वरिष्ठ कोषाधिकारी की अध्यक्षता में एक कमेटी गठित कर दी है।
वित्तीय वर्ष 2015-16 में मुजफ्फरनगर जिले में जल निगम की 37 योजनाएं संचालित हैं। इन योजनाओं की कुल लागत 19 करोड़ 59 लाख 96 हजार है। जनपद में जो योजनाएं चल रही हैं, उनके रखरखाव के लिए भी प्रदेश सरकार प्रति वर्ष पैसा जारी करती है। इस पैसे पानी की टंकी, पाइप आदि के रखरखाव की व्यवस्था करना, आपूर्ति को बढ़ाना आदि शामिल होता है।
योजना के अंतर्गत अकेले मुजफ्फरनगर जनपद को सात करोड़ 86 लाख 79 हजार जारी हुआ।
दो माह पूर्व जिले के ग्राम प्रधानों की बैठक में यह मामला उठा था कि अधिकतम गांवों में पानी की आपूर्ति नहीं हो पा रही है। कहीं पाइप फटने की दिक्कत है तो कहीं अन्य छोटी दिक्कतें हैं।
बैठक में अधिशासी अभियंता केबी जैन ने यह कहा था कि उनके पास बजट नहीं है। यह मामला शासन तक पहुंचा तो शासन ने वह सूची जारी कर दी, जिसमें रखरखाव का पैसा दिया गया है। सीडीओ के संज्ञान में जैसे ही यह मामला आया, उन्होंने वरिष्ठ कोषाधिकारी पवन कुमार की अध्यक्षता में एक कमेटी गठित कर दी। यह कमेटी इस बात की जांच करेगी कि सरकार से मिला पैसा किस मद में खर्च किया गया।
जल्द सौंपेंगे जांच रिपोर्ट
वरिष्ठ कोषाधिकारी पवन कुमार ने बताया जांच के लिए उनकी अध्यक्षता में तीन सदस्य जांच कमेटी गठित की गई है। कमेटी ने अपना काम शुरू कर दिया है। मुख्यमंत्री के दौरे में व्यस्त होने के कारण थोड़ी देरी हुई है, जल्द ही जांच रिपोर्ट सीडीओ को सौंप दी जाएगी।