मुजफ्फरनगर। परासौली में धर्मस्थल पर पशु अवशेष डालकर आपत्तिजनक बातें लिखने की वारदात को आगरा के धर्मांतरण विवाद का बदला लेने के लिए अंजाम दिया गया। पुलिस इस प्रकरण को भी परासौली बवाल की जांच में शामिल कर आरोपियों तक पहुंचने की जद्दोजहद में जुट गई है।
बुढ़ाना के गांव परासौली में धार्मिक स्थल पर पशु अवशेष डालकर दीवार पर बेहद आपत्तिजनक पंक्तियां लिखने का उद्देश्य महज एक समुदाय की भावनाओं को भड़काने का ही था। दीवार पर लिखी इबारत को भी आईएसआईएस के संस्थापक बगदादी और उसके भारतीय प्रचारक मेंहदी से जोड़ते हुए इस संगठन का प्रचार कर लोगों को डराने की भी कोशिश की गई। विभागीय सूत्रों की मानें तो प्रथम दृष्टया जांच में वारदात को आगरा के धर्मांतरण विवाद का बदला लेने की नीयत से ही अंजाम दिया गया है। करीब सवा साल पूर्व भड़की हिंसा के मद्देनजर मुजफ्फरनगर का चयन भी सोच-समझकर ही किया गया। हालांकि जिले के अमनपसंद लोगों की सहनशीलता और जागरूकता के चलते असामाजिक तत्वों के नापाक इरादे नाकाम हो गए। एसपी देहात आलोक प्रियदर्शी ने बताया कि जिस तरह पशु अवशेष डालने के साथ ही पर्चे व किताब रखकर दीवार पर आपत्तिजनक बातें लिखी गईं, वे लोगों की भावनाओं को भड़काकर चर्चित धर्मांतरण विवाद का बदला लेने की साजिश का हिस्सा हो सकती है। हालांकि फिलहाल इस तरह का कोई सुबूत नहीं मिला है, लेकिन जांच में इस आशंका को भी शामिल किया जा रहा है।