मुजफ्फरनगर। सांप्रदायिक हिंसा के बाद जहां खुफिया एजेंसियां जिले पर मंडरा रहे आतंकी साये के चलते पुलिस-प्रशासन को सतर्क रहने के निर्देश जारी कर रही है, वहीं दूसरी तरफ स्थानीय खुफिया इकाई की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। विभागीय कार्यदक्षता का आलम यह कि शहर में बांग्लादेशी परिवार अवैध रूप से दस साल से अधिक समय तक रहता रहा। यहां तक कि परिवार की दो बेटियाें की भी शादियां शहर में ही हो गईं, लेकिन स्थानीय अभिसूचना इकाई के साथ ही अन्य खुफिया टीमों को भी दस साल तक इस परिवार की भनक तक नहीं लग पाई। अब अवैध रूप से रह रहे इस परिवार को हिरासत में लेकर भले ही खुफिया विभाग के अधिकारी अपनी पीठ थपथपा रहे हों, लेकिन यह भी सच है कि यदि इस संबंध में गोपनीय रूप से शिकायत नहीं की जाती तो शायद ही अब भी यह परिवार कानून के शिकंजे में आ पाता। ऐसे में यदि आतंकी गतिविधियों की कोई भी आशंका सच साबित होती है तो यहां के बाशिंदों के भविष्य का सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है।
तस्करी के आरोप में जेल में है परिवार का मुखिया
मुजफ्फरनगर। महमूदनगर से पकड़े गए बांग्लादेशी परिवार का मुखिया तस्करी के आरोप में अपने ही देश की किसी जेल में बंद है। विभागीय सूत्रों के मुताबिक, बांग्लादेशी परिवार से प्राथमिक दौर की पूछताछ में यह सनसनीखेज खुलासा हुआ है कि परिवार का मुखिया पहले से ही तस्करी के आरोप में कानून के शिकंजे में फंसा हुआ है। इस संबंध में अभी अफसर कुछ भी बोलने को तैयार नहीं हैं।