फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कर्मचारी की मौत पर चीनी मिल में बखेड़ा

Sun, 20 Apr 2014 05:31 AM IST
Muzaffar nagar
विज्ञापन
विज्ञापन
मोरना। शुगर मिल में कर्मचारी की हार्टअटैक से हुई मौत पर जमकर हंगामा हुआ। परिजनों ने मिल प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए लाश आफिस के सामने रखकर धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया। मांग पूरी नहीं होने पर मिल को भी बंद करा दिया गया। मौके पर पहुंचे अफसरों ने मृतक आश्रित को मिल में नौकरी, मुआवजा और अन्य आर्थिक लाभ दिलाने का आश्वासन देकर लोगों को शांत किया।
विज्ञापन

गांव ककराला निवासी छोटन सिंह (56) पुत्र जीवन मोरना शुगर मिल में लैब ब्वॉय पद पर कार्यरत था। शुक्रवार को वह नाइट शिफ्ट में काम कर रहा था। शनिवार तड़के करीब 4.30 बजे वह मिल की कैंटीन में चाय पीकर लौट रहा था। उसी समय उसे हार्टअटैक हो गया। आरोप है कि सूचना देने के बावजूद मिल प्रबंधन ने सोमपाल को चिकित्सालय नहीं भेजा। करीब दो घंटे बाद पहुंचे परिजन छोटन को जिला अस्पताल के लिए लेकर निकले, लेकिन रास्ते में ही उसकी मौत हो गई। इससे गुस्साए परिजन लाश लेकर शुगर मिल पहुंच गए और जीएम आफिस के सामने लाश रखकर धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया। आरोप लगाया कि मिल प्रबंधन ने तत्काल छोटन सिंह को उपचार नहीं दिलाया, जिस कारण उसकी मौत हुई।
सूचना पर पहुंचे लोगों ने जीएम रामअवतार से छोटन के बेटे मनीष को आश्रित कोटे से नौकरी, मुआवजा और बीमा लाभ दिलाए जाने की मांग की। जीएम के हाथ खड़े करने पर लोगों ने आफिस में ही उन्हें बंधक बनाकर मिल बंद करा दिया। सूचना पर एडीएम (एफ) रामकिशन शर्मा और एसपी सिटी मौके पर पहुंचे और प्रतिनिधिमंडल से वार्ता की। इसमें परिजनों की सभी मांगों की संस्तुति शासन से किए जाने का आश्वासन देकर लोगों को शांत किया गया। इसके बाद करीब तीन बजे पुलिस लाश कब्जे में लेने में सफल हो सकी। इस दौरान भोकरहेड़ी चेयरमैन कैप्टन ज्ञानेंद्र सिंह, पूर्व चेयरमैन राजेश कुमार, डॉ. वीरपाल निर्वाल, मिंटू राठी, अनुज पहलवान, अमित राठी, योगेश शर्मा, वरुण सहरावत और बबलू यादव आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन

मिल में चली गई सारी जमीन
मोरना। दि गंगा किसान सहकारी चीनी मिल की स्थापना वर्ष 1983 में हुई थी। तब छोटन सिंह के पिता जीवन सिंह की 32 बीघा जमीन मिल स्थापित करने के लिए अधिग्रहीत कर ली गई थी। इसके एवज में जीवन सिंह के दो बेटों छोटन और सुखबीर को मिल में नौकरी दी गई थी। तब से भूमिहीन हो चुके परिवार के भरण-पोषण का सहारा मिल की नौकरी ही है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें