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मासूम के खून से नहीं कांपे हाथ

Sun, 20 Apr 2014 05:31 AM IST
Muzaffar nagar
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मुजफ्फरनगर। शहर के रामपुरी मुहल्ले में रिटायर डाक कर्मचारी मांगेराम के घर का वीभत्स नजारा देखकर लोगों की रूह कांप गई। एक घर में खून से लथपथ तीन लाशें। हैवानियत ऐसी कि तीन साल की मासूम पर गंड़ासा चलाते हुए भी हाथ नहीं कांपे। शुक्रवार की रात इस घर में क्या और कैसे हुआ कोई बताने वाला नहीं है। दस माह का मासूम चश्मदीद है, लेकिन वो बताए भी तो क्या?
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मोहल्ला रामपुरी में मांगेराम के घर से तीन लाशें उठी। शाम तक यह परिवार हंसता-खेलता हुआ सोया था, रात में ऐसा क्या हुआ कि सबकुछ खत्म हो गया। घर के एक कमरे में पलंग और सोफे के बीच मीनाक्षी की लहूलुहान लाश थी। पास में सोफे पर मासूम सांभवी उर्फ चिंकी का लहूलुहान शव था। दोनों के चेहरे और हाथों पर घास काटने वाले गंड़ासे से कई वार किए गए थे। बड़ा सवाल यही है कि घर में यह खूनखराब किसने किया। पुलिस की मानें तो आशु का रात में बीवी से झगड़ा हुआ और फिर उसने कत्ल कर खुद को फांसी लगा ली। पुलिस की इस थ्योरी पर भरोसा करें तो आशू बीवी का कत्ल क्यों करेगा। परिवार के लोगों का कहना है कि दंपति के बीच अच्छे तालमेल थे। एकबारगी मान भी लें कि कत्ल आशु ने किया, तो बड़ा सवाल ये भी है कि तीन साल की मासूम से उसकी क्या दुश्मनी थी? अगर उसे परिवार खत्म ही करना था तो दस माह के मासूम बेटे को क्यों छोड़ दिया। फांसी पर लटके मिले आशू के शरीर अथवा कपड़ों पर खून के छींटे तक नहीं हैं, ऐसे में पुलिस ने यह कैसे मान लिया कि कत्ल आशु ने ही किए। परिजनों की मानें तो वारदात में इस्तेमाल गंड़ासा पहले घर में नहीं देखा। गंड़ासा कौन लाया, किसी को नहीं पता। आशु की लाश के ठीक पीछे कुछ दूरी पर स्टूल रखा मिला, जो आशू के छटपटाने के बावजूद नहीं गिरा।
घसीटकर तो नहीं लाई गई लाश?
फर्श पर पड़ी शाकंभरी उर्फ के चेहरे के घावों से खून बहने से रोकने के लिए उसके सिर के नीचे कपड़े रखे गए थे। लाश को देखने से लग रहा था कि उसे दरवाजे से घसीटकर अंदर कमरे में लाया गया हो। शरीर से बह चुके खून को भी तकिये और अन्य कपड़ों की मदद से पोछने के निशान थे। बाद में लाश के ऊपर रजाई भी डाल दी गई थी। महिला के हाथ में घाव और अस्त-व्यस्त कपड़ों से साफ है कि उसने जान बचाने की भरसक कोशिश की।
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फोरेंसिक और डॉग स्क्वॉयड की जांच
मुजफ्फरनगर। रामपुरी में हुई वारदात के बाद फोरेंसिक टीम और डॉग स्क्वॉयड ने भी मौके पर पहुंचकर जांच-पड़ताल की। प्रशिक्षित डॉग स्क्वॉयड और कपड़े सूंघकर वहीं बैठा रहा। फोरेंसिक टीम ने भी घर की अलमारी, सोफे और डबल बेड से उंगलियों के नमूने और अन्य सुबूत जुटाए।
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